श्रीराम कथा का भव्य समापन: अविरल भक्ति और समर्पण का संदेश दे गए आचार्य युवराज पांडेय

उतई। धर्म ज्योति सनातन सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का आज भव्य समापन हुआ। अंतिम दिवस पर आचार्य पं. श्री युवराज पांडेय जी महाराज ने अरण्य कांड और किष्किंधा कांड की दिव्य कथा सुनाई, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।

हड्डियों का ढेर देख राम ने ली राक्षस विहीन धरती की प्रतिज्ञा
महाराज जी ने बताया कि चित्रकूट से विदा लेकर भगवान राम महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंचे, जहाँ माता अनुसूया ने माता सीता को नारी धर्म का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि नारी चार प्रकार की होती है – उत्तम, मध्यम, निकृष्ट और अधम। उत्तम नारी वही है जो मन-वचन-कर्म से अपने पति में ही परमात्मा को देखती है।

वन में आगे बढ़ने पर राम जी ने हड्डियों का विशाल ढेर देखा। ऋषि-मुनियों ने बताया कि ये हड्डियां संतों की हैं, जिन्हें रावण के राक्षस खा जाते थे। यह देख भगवान राम ने प्रतिज्ञा ली कि वे इस धरती को निशाचर विहीन कर देंगे।

प्रेम में स्वार्थ नहीं होना चाहिए
महाराज जी ने कहा कि दिमाग वाला प्रेम नहीं कर सकता, प्रेम तो निश्छल होता है। स्वार्थ में तो सब प्रेम करते हैं। सच्चा प्रेम वही है जहाँ कुछ मिलने की आशा न हो। उन्होंने शरभंग और सुतीक्ष्ण ऋषि की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान को आडंबर और सीजन भक्ति नहीं चाहिए, उन्हें तो एकनिष्ठ समर्पण और सच्चा भाव चाहिए। भटकना नहीं है, समर्पण एक में रखो।

यदि शूर्पणखा न होती तो रावण वध न होता
पंचवटी प्रसंग में महाराज जी ने कहा कि पंचवटी में सुंदर कुटिया बनाकर राम जी रहने लगे। तभी रावण की बहन शूर्पणखा नकली रूप धारण कर आई। मानस का हर पात्र महत्वपूर्ण है, यदि शूर्पणखा न होती तो रावण का वध भी न होता। खर-दूषण वध के समय भगवान ने लक्ष्मण जी को सीता जी की रक्षा का आदेश देकर स्वयं युद्ध किया।

उन्होंने कहा कि वेद पढ़ो, दान करो, यज्ञ करो, सब करो लेकिन जब तक सहज-सरल नहीं बनोगे, भगवान को प्रिय नहीं होगे। सीता जी स्वयं जगदंबा हैं।

कर्मा-ददरिया पर झूमा पंडाल
कथा के अंत में महाराज जी ने छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति से जोड़ते हुए कर्मा, ददरिया, सुवा, पंथी और भरथरी के सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी, जिस पर पूरा पंडाल झूम उठा। पूरे पंडाल में ‘श्री राम जय राम जय जय राम’ का जयकारा गूंज उठा।

राजनीति के लोग कथा में फॉर्मेलिटी न करें
महाराज जी ने मंच से कहा कि राजनीति के लोग कथा में फॉर्मेलिटी न करें। उन्होंने कहा कि पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू स्वयं रामायण के टीकाकार हैं, मैं उनसे सुनना चाहता हूं। ताम्रध्वज साहू ने सातों दिन कथा बैठकर सुनी। महाराज जी ने कहा कि सात दिन की कथा में से एक ही बात को पकड़ लो तो उद्धार हो जाएगा। अपनी ज्ञान की झोली खाली करके आना और यहाँ से भरकर जाना।

ताम्रध्वज साहू ने किया आभार व्यक्त
समापन अवसर पर पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने आचार्य जी का हृदय से धन्यवाद किया। उन्होंने क्षेत्र की जनता, प्रशासन, सभी विभागों, आम जनमानस और आयोजक समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह कथा हमारे क्षेत्र के लिए सौभाग्य है।
कथा के समापन के अवसर विधायक भिलाई देवेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता गिरीश देवांगन, अलोक, दुर्ग शहर अध्यक्ष धीरज बकालीवाल सहित गणमान्य जन उपस्थित थे।
कथा समापन के बाद विशाल महाभंडारे का आयोजन हुआ जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

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