सत्संग से ही मिलता है जीवन का विवेक, संत की पहचान के लिए अच्छा इंसान बनना जरूरी – आचार्य युवराज पांडेय

  • ‘हा राम-हा राम’ पुकारते हुए दशरथ ने त्यागे प्राण, सूनी हो गई अयोध्या – कथा सुन भावुक हुए श्रद्धालु


उतई। धर्म ज्योति सनातन सेवा समिति दुर्ग ग्रामीण द्वारा ग्राम बोरीगारका में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिवस पर हजारों श्रद्धालु उमड़े। कथा व्यास परम पूज्य आचार्य पं. श्री युवराज पांडेय जी महाराज ने निषादराज मिलन, केवट प्रसंग और चित्रकूट कथा का हृदयस्पर्शी वर्णन किया।
महाराज जी ने महाराज दशरथ के देवलोक गमन के बाद अयोध्या की दशा और भरत जी के अयोध्या आगमन का हृदयविदारक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर पूरा पंडाल भावुक हो उठा।


बिना सत्संग के विवेक नहीं
महाराज जी ने कहा कि पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र की कथा सत्संग में हमें सब कुछ दे देती है। बिना सत्संग के विवेक प्राप्त नहीं होता। संत जरूरी नहीं कि कोई तिलक लगाए, जटा रखे। जो भगवान को पकड़ ले, उसे पकड़ लो तो भगवान मिल जाएंगे। अच्छे संत को पहचानने के लिए आपको खुद एक अच्छा इंसान बनना पड़ेगा।
भगवान ने कभी छुआछूत नहीं माना
श्रीराम वनगमन पथ पर चलते हुए श्रृंगवेरपुर पहुंचते हैं, जहाँ निषादों का राज है। महाराज जी ने कहा कि भगवान कभी छुआछूत नहीं मानते। ‘सब मेरे लिए प्रिय हैं’ कहकर भगवान ने निषादराज गुहराज को गले से लगा लिया। राजा का कर्तव्य प्रजा की रक्षा करना है।


केवट को मिला चरण धोने का सौभाग्य
गंगा पार करने के प्रसंग में केवट ने कहा कि मुझे आपके चरणों की धूल से डर है, यदि नाव में बैठना है तो चरण धोने पड़ेंगे। तुलसीदास जी लिखते हैं कि केवट को भगवान के चरण धोने का जो सौभाग्य मिला वह देवताओं को भी दुर्लभ है। भगवान ने प्रसन्न होकर केवट के सिर पर हाथ रखा।
नारी का सर्वोच्च स्थान
महाराज जी ने कहा कि रामचरितमानस में 14 स्थान बताए हैं जहाँ प्रभु निवास करते हैं। ग्रंथों में नारी को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, तभी भगवान के नाम से पहले नारी का नाम आता है – लक्ष्मी नारायण, सीताराम।


सूनी हुई अयोध्या
महाराज जी ने कहा कि राम के वन जाने के बाद महाराज दशरथ पुत्र वियोग सहन नहीं कर पाए और ‘हा राम-हा राम’ पुकारते हुए प्राण त्याग दिए। जिस समय दशरथ जी ने देह त्यागी उस समय चारों पुत्रों में से एक भी उनके पास नहीं था। अयोध्या जो राजतिलक की खुशियों में झूम रही थी, शोक में डूब गई।
भरत जैसा भाई संसार में दूसरा नहीं, जिस राजगद्दी के लिए कैकेयी ने सब किया, भरत ने उसी को ठुकरा दिया। यही सच्चा त्याग है।
इस अवसर पर विधायक दुर्ग ग्रामीण ललित चन्द्रकार,पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व विधायक अरुण वोरा,अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग प्रीतपाल बेलचंदन, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, भिलाई से इंद्रजीत छोटू सिंह, नगर पालिका महापौर शशि सिन्हा, सभापति केशव बंछोर, पूर्व सभापति योगिता चंद्राकर, सदस्य लक्ष्मी साहू, झमित गायकवाड़, जनपद उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी, कमलेश गजपाल, योगनारायण गजपाल, वेदनारायण साहू, रामसिंह सोनबोइर, सरपंच चुम्मन यादव, जागेश्वर साहू, राजेश साहू, गिरीश साहू, दुष्यंत साहू, कुलेश्वर जांगड़े, दीपक यादव सहित समिति के सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। अंतिम दिन की कथा दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक होगी एवं रात्रि में रंग झरोखा की प्रस्तुति होगी मंच संचालन दीपक कौशिक ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *