टिकेंद्र वर्मा @रानीतराई। पाटन क्षेत्र के ग्राम तेलीगुंडरा में प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय का घेराव करने जा रहे किसानों को बीते कल पाटन के उच्च अधिकारियों द्वारा रास्ते में ही रोक दिया गया था। किसानों के साथ मौजूद सैकड़ों मवेशियों को अस्थाई रूप से तेलीगुंडरा के सामुदायिक भवन में रखा गया था। उस वक्त अधिकारियों ने दावा किया था कि इन सभी मवेशियों को जल्द ही सुरक्षित गौशालाओं या अन्य स्थानों पर शिफ्ट कर दिया जाएगा।

खोखले साबित हुए वादे, आहाते में फंसे 100 मवेशी
प्रशासन द्वारा कुछ मवेशियों को शिफ्ट तो किया गया, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि अभी भी करीब 100 मवेशी सामुदायिक भवन के आहाते (परिसर) में ही बंद हैं। कल से लेकर आज तक इन मवेशियों को न तो चारा नसीब हुआ है और न ही पीने का पानी।
भारी बारिश में कांप रहे बेजुबान, स्थिति गंभीर
क्षेत्र में हो रही लगातार मूसलाधार बारिश के बीच ये बेजुबान जानवर खुले आसमान के नीचे 24 घंटों से खड़े-खड़े कांप रहे हैं। भूखे-प्यासे और लगातार भीगने के कारण कई मवेशियों की तबीयत बिगड़ने लगी है और उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर होती जा रही है। अगर जल्द ही इन्हें राहत नहीं मिली, तो किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों की बेरुखी पर उठे सवाल, जिम्मेदार कौन?
इतनी संवेदनशील स्थिति होने के बावजूद स्थानीय प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मामले को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। मौके पर मौजूद ग्रामीणों और किसानों में इस बेरुखी को लेकर भारी आक्रोश है।
अब तेलीगुंडरा के किसान एसडीएम कार्यालय घेराव करने की कर रहे तैयारी
अब तेलीगुंडरा के किसान प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चिंतित हैं। किसानों को आशंका है कि यदि मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया तो कहीं इन सभी मवेशियों को वापस उनके गांव में ही न छोड़ दिया जाए। किसानों का कहना है कि खुले में घूमने वाले मवेशियों के कारण पहले से ही फसलों को नुकसान हो रहा है और इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। मवेशियों की स्थिति और प्रशासन द्वारा किए गए वादे के पूरा नहीं होने से नाराज तेलीगुंडरा के किसान एसडीएम कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि तेलीगुंडरा में रखे गए मवेशियों को कब और कहां भेजा जाएगा तथा उनकी देखभाल की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
