व्यक्तिगत टिप्पणी को समाज से जोड़ना उचित नहीं, इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है : महेश्वर बंछोर


सेलूद। सोशल मीडिया एवं डिजिटल मीडिया में सेलूद के पूर्व सरपंच खेमलाल साहू की सोशल मीडिया व्हाट्सएप चैट में की गई टिप्पणी को जिस प्रकार प्रस्तुत किया जा रहा है, उसे भाजपा शक्ति केंद्र सेलूद के संयोजक महेश्वर बंछोर ने राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत एवं राजनीतिक टिप्पणी को किसी समाज विशेष से जोड़कर प्रस्तुत करना उचित नहीं है। इससे समाज में अनावश्यक भ्रम और गलतफहमी पैदा होती है।
महेश्वर बंछोर ने कहा कि जिस व्हाट्सएप ग्रुप में यह टिप्पणी की गई है, वे स्वयं भी उस ग्रुप के सदस्य हैं। उनके अनुसार खेमलाल साहू द्वारा उपयोग किया गया ‘अशुभहा’ शब्द किसी पद विशेष के संदर्भ में कहा गया था, न कि किसी समाज, जाति अथवा समुदाय के लिए। ऐसे में उक्त शब्द को किसी समाज विशेष से जोड़कर प्रस्तुत करना वास्तविक संदर्भ से अलग होगा।
उन्होंने कहा कि यह विषय मूल रूप से पूर्व सरपंच और वर्तमान सरपंच के बीच का स्थानीय एवं राजनीतिक मामला है। इसे सामाजिक विवाद का रूप देना उचित नहीं है। खेमलाल साहू पूर्व सरपंच होने के साथ लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं और सामाजिक क्षेत्र में भी विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते रहे हैं। ऐसे में व्यक्तिगत, राजनीतिक टिप्पणी और किसी पूरे समाज के प्रति टिप्पणी के बीच अंतर को समझना आवश्यक है।
बंछोर ने कहा कि यदि किसी टिप्पणी को लेकर विवाद है तो उसके वास्तविक संदर्भ, पूरी बातचीत और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने रखा जाना चाहिए। किसी टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पूरे समाज से जोड़ने से सामाजिक स्तर पर गलतफहमी पैदा हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जब जनता की सेवा के लिए पद पर होते हैं तो जनता अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती है। यदि हर प्रतिक्रिया को संबंधित जनप्रतिनिधि के समाज से जोड़कर देखा जाने लगे, तो जनता के लिए अपनी बात रखना भी कठिन हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि समाज किसी व्यक्ति विशेष की टिप्पणी को पूरे समाज की भावना नहीं मानता। व्यक्तिगत मतभेद और राजनीतिक विवाद को सामाजिक विवाद का रूप देना सामाजिक सौहार्द के हित में नहीं है। किसी व्यक्तिगत टिप्पणी के कारण दो समाजों के बीच वैमनस्य की स्थिति पैदा होना उचित नहीं होगा।
महेश्वर बंछोर ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सामाजिक भाईचारा और आपसी सद्भाव सबसे ऊपर है। राजनीति में लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन गांव का सामाजिक सौहार्द और भाईचारा सभी समाजों की सहभागिता से कायम रहता है। इसलिए किसी भी व्यक्तिगत टिप्पणी को सामाजिक रंग देने के बजाय वास्तविक संदर्भ को समझते हुए आपसी एकता, सद्भाव और सुमति बनाए रखना ही उचित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *