- पाटन विधानसभा क्षेत्र के 44 सेवानिवृत्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया सम्मान
पाटन। शिक्षक दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं पाटन विधायक भूपेश बघेल के आमंत्रण पर पतोरा में 29 वर्षों से चली आ रही गुरु सम्मान की परंपरा का भव्य आयोजन किया गया। शनिवार को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पतोरा के प्रांगण में आयोजित समारोह में पाटन विधानसभा क्षेत्र के 44 सेवानिवृत्त शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति शिव कुमार पाण्डेय रहे। अध्यक्षता विवेकानंद आश्रम, रायपुर के शिक्षाविद् ओमप्रकाश वर्मा ने की। विशेष अतिथि के रूप में शिक्षाविद् सैय्यद फाजिल, समाजसेवी सीताराम वर्मा तथा कवि मीर अली मीर उपस्थित रहे।
शिक्षा से ही समाज और राष्ट्र का निर्माण : भूपेश बघेल
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करते हुए कहा कि शिक्षा का महत्व आदि काल से रहा है। भगवान राम और श्रीकृष्ण ने भी गुरु की शरण में जाकर शिक्षा ग्रहण की थी। शिक्षा का महत्व कभी कम नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शिक्षा सभी के लिए सुलभ हो, इसके लिए शासन स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं। जनता के सहयोग से भी अनेक विद्यालय स्थापित हुए। बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गांवों के आसपास शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिसके परिणामस्वरूप बालिकाओं की शिक्षा का प्रतिशत लगातार बढ़ा है।
श्री बघेल ने कहा कि अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूलों में फीस अधिक होने के कारण गरीब परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाते थे। हमारी सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों की स्थापना कर गरीब बच्चों के लिए निःशुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की व्यवस्था की थी।
उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में 10 हजार स्कूल बंद हो चुके हैं और शिक्षक भर्ती भी बंद है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति का हो, यदि उसे अच्छी शिक्षा मिल जाए तो वह सही और गलत के बीच निर्णय लेने में सक्षम बनता है।
उन्होंने आजादी की लड़ाई में शिक्षकों के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण और समाज को दिशा देने में शिक्षकों की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है।
शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी : शिव कुमार पाण्डेय
मुख्य अतिथि शिव कुमार पाण्डेय ने कहा कि माता-पिता प्रथम गुरु होते हैं, जबकि ज्ञान की बातें सिखाने और पढ़ाने वाले शिक्षक जीवन को नई दिशा देते हैं। प्राथमिक शाला के शिक्षक बच्चों को वर्णमाला और ज्ञान की पहली सीढ़ी से परिचित कराकर उनके जीवन की नींव रखते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु हर दिन और हर पल सम्मान के अधिकारी हैं। शिक्षा केवल रोजगार प्राप्त करने का साधन न बने, बल्कि व्यक्ति के चरित्र और संस्कार का निर्माण करे, ऐसी शिक्षा की आज आवश्यकता है।
घुघवा से पतोरा तक पहुंची 29 साल पुरानी परंपरा
शिक्षक दिवस पर गुरु सम्मान समारोह आयोजित करने की यह परंपरा वर्ष 1997 में ग्राम घुघवा से शुरू हुई थी। इसके बाद पाटन विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में यह आयोजन होता रहा। 29 वर्षों से निरंतर चली आ रही इस परंपरा का वर्ष 2026 में ग्राम पतोरा में आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में संतोष साहू एवं राघव म्यूजिकल ग्रुप कोटगांव, कुरूद, जिला धमतरी द्वारा भजन प्रस्तुति दी गई, जिसने समारोह को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
वक्ताओं ने कहा कि गुरुजनों का सम्मान केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों के अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
समारोह में पूर्व ओएसडी आशीष वर्मा, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र चंद्रवंशी, पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक साहू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयश्री वर्मा, जवाहर वर्मा, अश्वनी साहू, महेंद्र वर्मा, जनपद सदस्य दिनेश साहू, उर्वशी वर्मा, अजय सिंगौर, उमाकांत चंद्राकर, शालिक साहू, सरपंच भुनेश्वर साहू, जनपद सदस्य चंद्रिका चित्रसेन कलिहारी, खिलेश मार्कण्डेय, राकेश साहू, अंशु रजक, भेष आठे, देवचरण कौशल, अजय साहू, जीवधन ठाकुर,भेदप्रकाश वर्मा, धनंजय साहू,भोलू बंधे, सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, गणमान्य नागरिक एवं छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।
