शिक्षा मंत्री के गृह जिले में आंदोलन के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

  • शौचालय के लिए सड़क पर उतरे नौनिहाल, एक घंटे तक दुर्ग-पाटन मार्ग जाम
  • सेजेस सेलूद की बदहाली पर फूटा छात्रों का गुस्सा, जर्जर शौचालय, टूटी बाउंड्रीवाल और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
  • सांसद विजय बघेल ने 2 जनवरी को शिक्षा मंत्री को लिखा था पत्र, फिर भी अब तक राशि स्वीकृत नहीं
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पाटन। स्वामी आत्मानंद शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेलूद में शौचालय और बाउंड्रीवाल की मांग को लेकर मंगलवार सुबह सैकड़ों छात्र-छात्राओं का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा। सुबह करीब 9 बजे विद्यार्थियों ने दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब एक घंटे तक मार्ग बाधित रहा, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई।

चक्काजाम की जानकारी मिलने के करीब एक घंटे बाद नायब तहसीलदार मनोज रस्तोगी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्र-छात्राओं से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद विद्यार्थियों ने सड़क खाली कर दी और स्कूल लौट गए।

एबीईओ ने किया स्कूल का निरीक्षण, इस्टीमेट बनाने के निर्देश…...

शिक्षा विभाग की ओर से एबीईओ प्रदीप महिलांगे भी स्कूल पहुंचे। उन्होंने बच्चों से उनकी समस्याओं की जानकारी ली और स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। श्री महिलांगे ने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को जल्द पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बच्चों से सड़क पर आंदोलन करने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील भी की।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल के जर्जर शौचालय और क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवाल की स्थिति देखी। स्थिति को देखते हुए उन्होंने प्राचार्य मिताली सेन को आवश्यक निर्माण कार्य का इस्टीमेट तैयार कर भेजने के निर्देश दिए, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।

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जर्जर शौचालय, टूटा CCTV और कमजोर बाउंड्रीवाल…..

प्राचार्य ने अधिकारियों को स्कूल के जर्जर हो चुके शौचालय की स्थिति दिखाई। बताया गया कि असामाजिक तत्वों द्वारा शौचालय को क्षतिग्रस्त किया गया है। स्कूल में सुरक्षा के लिए लगाया गया सीसीटीवी कैमरा भी तोड़ दिया गया है।

वहीं स्कूल की बाउंड्रीवाल कई स्थानों से टूट चुकी है और पुरानी बाउंड्रीवाल काफी नीची है। इसके कारण शाम होते ही असामाजिक तत्वों के स्कूल परिसर में प्रवेश करने की शिकायत है। इससे स्कूल की संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।

सांसद विजय बघेल ने भी 2 जनवरी को लिखा था पत्र……

स्कूल की समस्या को लेकर यह भी सामने आया है कि सांसद विजय बघेल ने 2 जनवरी को शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सांसद प्रतिनिधि की मांग के संदर्भ में स्कूल में आवश्यक निर्माण कार्य के लिए राशि स्वीकृत करने का आग्रह किया था। बावजूद इसके अब तक राशि स्वीकृत नहीं होने की बात कही जा रही है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सांसद स्तर से जनवरी में ही पत्र लिखा जा चुका था, तो राशि स्वीकृति और निर्माण कार्य में अब तक देरी क्यों हुई? आखिरकार बच्चों को अपनी मूलभूत जरूरत के लिए सड़क पर उतरकर चक्काजाम करने की नौबत क्यों आई?

सरपंच ने मांगी पुलिस गश्त……

सरपंच खिलेश मार्कण्डेय ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से स्कूल में शौचालय और बाउंड्रीवाल निर्माण की मांग की गई है। साथ ही स्कूल मैदान और परिसर के आसपास शाम के समय पुलिस गश्त लगाने की मांग भी की गई है, ताकि असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

अब बच्चों के चक्काजाम के बाद प्रशासन हरकत में आया है। देखना होगा कि इस बार आश्वासन और इस्टीमेट की प्रक्रिया से आगे बढ़कर स्कूल को वास्तव में शौचालय, मजबूत बाउंड्रीवाल और सुरक्षित परिसर कब तक मिल पाता है।

शिक्षा मंत्री के गृह जिले में आंदोलन के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री के गृह जिले दुर्ग में विद्यार्थियों को अपनी मूलभूत सुविधाओं और शिक्षा से जुड़ी मांगों के लिए बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है। सेलूद में शौचालय और बाउंड्रीवाल की मांग को लेकर बच्चों को सड़क पर उतरकर चक्काजाम करना पड़ा।

इससे पहले ग्राम पतोरा के बच्चों ने हेडमास्टर द्वारा दुर्व्यवहार की शिकायत कलेक्टर दुर्ग से की थी। वहीं रानीतराई में शिक्षकों की कमी को लेकर बच्चों और पालकों ने तालाबंदी कर विरोध जताया था। इन मामलों में भी आंदोलन के बाद ही प्रशासन ने संज्ञान लिया।

इन घटनाओं से सवाल उठता है कि क्या शिक्षा मंत्री के गृह जिले में भी बच्चों की समस्याओं का समाधान बिना आंदोलन के नहीं हो सकता? क्या प्रशासन और शिक्षा विभाग स्कूलों की मूलभूत जरूरतों और विद्यार्थियों की शिकायतों पर आंदोलन से पहले ही गंभीरता से संज्ञान नहीं ले सकता?

बच्चों का काम सड़क पर उतरना नहीं, स्कूल में पढ़ाई करना है। प्रशासन को चाहिए कि स्कूलों की समस्याओं की नियमित निगरानी कर शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई करे, ताकि विद्यार्थियों को अपनी जायज मांगों के लिए चक्काजाम या तालाबंदी का सहारा न लेना पड़े।

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