प्राथमिक शाला कुगदा में 5 समस्या से जूझ रहे बच्चे व शिक्षक,,,,,,,,,

खबर हेमंत तिवारी,,,,,,,,,✍️✍️

पांडुका/ अंचल के ग्राम पंचायत कुगदा के शासकीय प्राथमिक शाला में इन 5 समस्या को लेकर बच्चे और शिक्षक परेशान हैं ।जिसमें पहला छत से टपकता पानी प्रमुख है।

एक किनारे में बैठकर शिक्षक और बच्चे पढ़ाई करते हैं। इसी तरह दूसरा समस्या पुराना भवन जो जीर्ण स्थिति में है जिसे डिस्मेंटल करने की जरूरत है जो बच्चों के लिए खतरा बना हुआ बच्चे खेलते खेलते वहां तक पहुंच जाते हैं शिक्षक मना करते हैं फिर भी बच्चे तो बच्चे हैं ।

इसी तरह तीसरी समस्या पिछले 3 पंचवर्षीय से प्रधान पाठक भवन अधूरा पड़ा है वह भी धीरे धीरे जीर्ण अवस्था की ओर जा रहा है अभी तक क्यों पूर्ण नहीं हुआ यह सवाल बना है और कब होगा पूर्ण आखिर क्यों निर्माण कार्य अटका है। इसका जवाब पंचायत विभाग और अधिकारियों के पास पास नहीं है ।

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चौथा समस्या स्कूल प्रांगण का है जहां बारिश होती है तो पूरा स्कूल प्रांगण पानी से भर जाता है पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने की वजह से प्राकृतिक रूप से जब तक धरती पानी सोख नहीं लेता तब तक ऐसे ही पानी भरा रहता है जिसमें कीड़े मकोड़े मच्छर पनपते हैं। जो स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है।

इसी तरह पांचवा समस्या अतिरिक्त कक्ष निर्माण का है।जो आज तक हैंड ओवर नहीं हुआ है।दीवालो में सीलन और टपकती पानी से यह निर्माण अधूरा ही है और आज तक इस अतिरिक्त कक्ष में स्कूल नहीं लग पा रहा है ।

जहां स्कूल को कुछ सामग्री को रखा गया जिस वजह से धीरे-धीरे कबाड़ में तब्दील हो रहा है सबसे बड़ी दिक्कत टपकती पानी को लेकर है। इस शासकीय प्राथमिक शाला में लगभग 96 बच्चे अध्यनरत है।

अलग-अलग कक्षाएं लगती है पर कुछ कक्षाओं में इस तरह स्थिति से सभी परेशान हैं ।आखिर प्रधान पाठक कक्ष आखिर क्यों नहीं बन पाया इसका जवाब जनपद और जिला में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों के पास नहीं है दो पंचवर्षीय के सरपंच बदल गए ।तीसरा कार्य काल चालू है पर यह भवन अधूरा का अधूरा है। इस बारे ग्राम के कुछ लोगों से जब चर्चा किया गया तो उन्होंने बताया कि इस पुराने भवन को डिस्मेंटल करने के लिए कई बार जन प्रतिनिधि वा प्रशासन को लिख चुके हैं शिकायतें भी की जा चुकी है।पर कोई सुनने को तैयार नहीं अंत में हम लोग हार मान कर अब किसी से ना कोई मांग कर रहे हैं ना ही कोई शिकायत कर रहे हैं कोई भी जनप्रतिनिधि आते हैं तो पहले इन्हीं मुद्दों पर बात की जाती है पर जनप्रतिनिधि सुनते ही नहीं हैं ।न ही समाधान निकाल पाते है। पूर्व की भांति अब शायद एक बार फिर चक्का जाम और धरना प्रदर्शन से ही इन समस्याओं का समाधान का रास्ता निकलेगा।

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