बीईओ, एबीईओ, बीआरसी एवं समस्त संकुल समन्वयकों को भेंट की गई ‘मोर अंगना के शोर’ पुस्तक

पाटन। मातृभाषा आधारित शिक्षण, बाल साहित्य और समावेशी शिक्षा को नई दिशा देने वाली बहुचर्चित बाल काव्य संग्रह ‘मोर अंगना के शोर’ की प्रतियाँ विकासखंड शिक्षा अधिकारी डालेन्द्र देवांगन, सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रदीप महिलांगे, बीआरसी गुणेश्वर वर्मा सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी सविता देशलहरे ,सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी आकांक्षा अग्रवाल तथा विकासखंड पाटन के समस्त संकुल समन्वयकों को सप्रेम भेंट की गईं। इस अवसर पर पुस्तक के उद्देश्य, शैक्षणिक उपयोगिता तथा विद्यालयों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

पुस्तक के संपादक विरेंद्र कुमार साहू ने बताया कि ‘मोर अंगना के शोर’ केवल एक बाल काव्य संग्रह नहीं, बल्कि बच्चों में भाषा विकास, सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता, नैतिक मूल्यों तथा मातृभाषा के प्रति आत्मीयता विकसित करने का अभिनव प्रयास है। पुस्तक में बच्चों के लिए सरल, रोचक एवं शिक्षाप्रद रचनाओं का संकलन किया गया है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान (एफएलएन) की अवधारणा को भी सशक्त बनाती हैं।

उन्होंने बताया कि पुस्तक की एक विशेषता यह भी है कि प्रत्येक रचना को क्यूआर कोड से जोड़ा गया है, जिससे बच्चे कविताओं को सुनते हुए भी सीख सकते हैं। यह सुविधा विशेष रूप से दिव्यांग एवं दृष्टिबाधित बच्चों सहित सभी विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है और समावेशी शिक्षा की भावना को मजबूत करती है।

विकासखंड शिक्षा अधिकारी डालेन्द्र देवांगन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय भाषा और संस्कृति पर आधारित ऐसी पुस्तकें बच्चों के सीखने को अधिक सहज, आनंददायक और प्रभावी बनाती हैं। एबीईओ प्रदीप महिलांगे ने कहा कि विद्यालयों में इस प्रकार के नवाचारपूर्ण साहित्य का उपयोग बच्चों में पठन-पाठन की रुचि बढ़ाने के साथ उनकी अभिव्यक्ति क्षमता को भी विकसित करेगा।

बीआरसी गुणेश्वर वर्मा ने पुस्तक को शिक्षकों के लिए भी उपयोगी बताते हुए कहा कि यह कक्षा शिक्षण में नवाचार का उत्कृष्ट माध्यम बनेगी। इस अवसर पर उपस्थित समस्त संकुल समन्वयकों ने भी पुस्तक की प्रशंसा करते हुए इसे विद्यालयों तक पहुँचाने और बच्चों के बीच अधिक से अधिक उपयोग में लाने का संकल्प व्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में संपादक विरेंद्र कुमार साहू प्रधान पाठक ने सभी शिक्षा अधिकारियों एवं संकुल समन्वयकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग का सहयोग और मार्गदर्शन इस प्रकार के नवाचारों को नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘मोर अंगना के शोर’ प्रदेश के विद्यालयों में बाल साहित्य, मातृभाषा शिक्षण और समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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