कोपरा से पोखरा मार्ग पर घटिया व चिकनी मुरूम बनी हादसों की वजह,30 से अधिक बाइक सवार गिरे,बड़ी दुर्घटना की आशंका,,,,

हेमंत तिवारी,,,,,,,,,

राजिम – कोपरा से पोखरा मार्ग इन दिनों लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बन गया है। सड़क निर्माण के दौरान कोपरा,कौंदकेरा और देवरी गांव के पुलों के समीप डाली गई घटिया एवं अत्यधिक चिकनी मुरूम के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार आज सुबह से शाम तक 30 से अधिक लोग मोटरसाइकिल सहित सड़क पर गिरकर घायल हो चुके हैं। लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।जिससे लोगों में भारी नाराजगी है।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। पुलों के आसपास ऐसी चिकनी मुरूम बिछा दी गई है।जिस पर हल्की बारिश या नमी होने के बाद वाहन का संतुलन बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।

विशेष रूप से मोटरसाइकिल चालक और बुजुर्ग सबसे अधिक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। कई लोगों को हाथ,पैर में चोटें आई हैं।जबकि कुछ को उपचार के लिए अस्पताल भी जाना पड़ा।स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार को इस समस्या से अवगत कराया गया।लेकिन अब तक न तो सड़क की मरम्मत की गई और न ही दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई सुरक्षा व्यवस्था की गई। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार कार्य नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ी जनहानि हो सकती है।ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से प्रतिदिन छात्र-छात्राएं,किसान, व्यापारी,कर्मचारी इस रस्ते से गुजरते हैं। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण सभी को जोखिम उठाकर यात्रा करनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग की लापरवाही आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि कोपरा भेंडरी मोड़,कौंदकेरा स्कूल के पास एवम देवरी पुल के पास तत्काल गुणवत्तापूर्ण सामग्री से सड़क की मरम्मत कराई जाए।

चिकनी मुरूम हटाई जाए तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सुरक्षा संकेतक बोर्ड लगाए जाएं। ग्रामीणों ने कहा हैं कि यदि शीघ्र गिट्टी एवम अन्य सामग्री भी नहीं डाला गया।तो जनआंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।फिलहाल लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों ने बैरीकेट लगाने की मांग किया हैं।

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