ग्राम पतोरा के शासकीय भूमि का पीएमओ के आदेश पर हुआ था सीमांकन, अब सुशासन तिहार का आवेदन एक माह से फाइलों में

  • 23 एकड़ शासकीय भूमि पर मिला था कब्जा, 10 एकड़ में नरवा-गरवा योजना के तहत बना चारागाह, शेष भूमि की स्थिति जानने फिर उठी सीमांकन की मांग

पाटन। ग्राम पंचायत पतोरा में शासकीय भूमि के सीमांकन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुशासन तिहार के दौरान पंचायत द्वारा गांव की शासकीय भूमि का सीमांकन कराने के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी राजस्व विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्हें शासकीय भूमि के सीमांकन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वर्ष 2019 में भी खदान क्षेत्र से लगी शासकीय भूमि के सीमांकन की मांग को लेकर तत्कालीन पंच गोपेश साहू ने राजस्व विभाग को कई आवेदन दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के नाम आवेदन भेजा था। पीएमओ कार्यालय से निर्देश जारी होने के बाद ही राजस्व विभाग ने सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की थी।
उस दौरान हुए सीमांकन में करीब 23 एकड़ शासकीय भूमि पर खदान संचालकों द्वारा कब्जा कर गिट्टी एवं अन्य सामग्री का अवैध भंडारण किए जाने का मामला सामने आया था। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भूमि को कब्जामुक्त कराया गया।
ग्रामीणों के अनुसार कब्जामुक्त कराई गई भूमि में से लगभग 10 एकड़ क्षेत्र को चारागाह के रूप में सुरक्षित रखा गया था। तत्कालीन कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी नरवा, गरवा, घुरुवा, बाड़ी योजना के तहत इस चारागाह क्षेत्र में तार घेरा (फेंसिंग) भी कराया गया था, ताकि पशुओं के लिए सुरक्षित चराई क्षेत्र विकसित किया जा सके। हालांकि शेष लगभग 13 एकड़ शासकीय भूमि की वर्तमान स्थिति और वास्तविक स्थान की जानकारी आज तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।
ग्राम सरपंच भुनेश्वर साहू ने बताया कि पंचायत ने शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और सीमांकन कराने के उद्देश्य से सुशासन तिहार में आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि सीमांकन होने से शासकीय भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा भविष्य में अतिक्रमण की संभावनाओं पर भी रोक लगेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पूर्व में पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद सीमांकन संभव हुआ था, तो इस बार स्थानीय स्तर पर दिए गए आवेदन पर कार्रवाई में देरी समझ से परे है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सीमांकन कराकर शासकीय भूमि की स्थिति स्पष्ट करने और पंचायत को पूरी जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।


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