पहले रमन सरकार के 15 साल के भ्रष्टाचार का बहीखाता देखें साय, बाद में मांगे भूपेश सरकार से 18 माह का हिसाब – राजेंद्र साहू


किसानों को 6 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि तीन किस्तों में देने वाले भाजपा नेता एकमुश्त भुगतान का ज्ञान न दें

दुर्ग। किसान न्याय योजना की राशि एक साथ देने से संबंधित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु देव साय के बयान को कांग्रेस ने हास्यास्पद करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने कहा कि मोदी सरकार किसानों को 6 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि और कोरोना संकट काल में गरीब जनधन खाताधारकों को महज 15 सौ रुपए की राशि 3 किस्तों में दे रही है। साय में हिम्मत है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसानों और गरीबों को एकमुश्त भुगतान कराएं। राशि भुगतान को लेकर साय समेत भाजपा नेताओं को ज्ञान देने की जरूरत नहीं है।
राजेंद्र ने कहा कि विष्णु देव साय केंद्रीय इस्पात मंत्री रह चुके हैं। केंद्र में अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए वे मोदी सरकार से धान के समर्थन मूल्य में मात्र 53 रुपए की बढ़ाकर 1868 रुपए करने की बजाय सीधे 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग करें। साय को मोदी सरकार से श्रमिक कल्याण रोजगार योजना को छत्तीसगढ़ में लागू करने की मांग भी करना चाहिए।
राजेंद्र ने साय पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें प्रदेश की कांग्रेस सरकार से 18 माह का हिसाब मांगने की बजाय 15 साल के रमन सरकार और 6 साल के मोदी सरकार के कार्यों का हिसाब मांगना चाहिए। मोदी और रमन सिंह ने कितने वादे पूरे किए? इसका हिसाब साय को मांगना चाहिए। किसानों के धान का बोनस हजम करने वाले, रतनजोत से डीजल बनाने के नाम पर घोटाला, मोबाइल बांटकर घोटालेबाजी करने वाले भाजपा नेताओं को भूपेश सरकार से हिसाब मांगने से पहले अपने काले कारनामों का हिसाब देना चाहिए।
राजेंद्र ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार ने किसानों का कर्जा माफ किया है। धान की खरीदी 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से की गई है। गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुधन की रक्षा करने के साथ ही पशुपालकों की आय बढ़ाने के साथ पशुधन का संरक्षण कर रही है। भाजपा के 15 साल के शासनकाल के दौरान हर योजना में सिर्फ भ्रष्टाचार हुआ है। दूसरी ओर, भूपेश सरकार ने सरकार की योजनाओं का पैसा सीधे किसानों, गरीबों और आदिवासियों के बैंक खाते में डाला है। साय को हिसाब पूछना है तो 15 साल तक रमन सरकार के भ्रष्टाचार का हिसाब मांगे। कांग्रेस सरकार को नसीहत देने की जरूरत नहीं है।

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