भिलाई: छतीसगढ़ में सदियों से तीजा पोला में महिलाओं के मायके जाने पर प्रतिबन्ध लगाने की जानकारी मिलने पर कई महिलाओं ने सवाल किया है इसी तारतम्य मे सामाजिक कार्यकर्ता श्रद्धा पुरेन्द्र साहू ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाया है उन्हीने कहा कि कोरोना के कारण किसी त्योहार में रौनक नहीं है वहीं दूसरी ओर शराब भट्टी और बड़े-बड़े होटल के बार में पुरुष वर्ग की रौनक देखते बनती है तो क्या सारे नियम कानून महिलाओं के लिए ही है यदि किसी गांव में तीजा लाने ले जाने के लिए प्रतिबंध लगाया जा रहा है तो पुरुष वर्ग के लिए भी दारू भट्टी जाने के लिए प्रतिबंध लगना चाहिए जब पुरुष वर्ग दारु भट्टी जा सकते हैं और महिलाएं खेत में काम करने जा सकते हैं तो मायके क्यों नहीं जा सकती और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह शासन का आदेश नहीं है यह ग्राम स्तरीय प्रतिबंध लगाया गया है श्रीमती साहू ने कहा कि सरकार ने पिछले साल तीजा में 2 दिन की छुट्टी दी है जो छतीसगढ़ की महिलाओं के लिये सम्मान की बात है श्रीमती श्रद्धा पुरेन्द्र साहू ने कहा कि कोरोना से बचाव ही समझदारी है इसलिये इसके आड़ में सदियों की परंपरा को सार्वजनिक प्रतिबन्ध लगाना उचित नही है
