“हमर माटी के मड़ई तिहार” : राजनांदगांव में 10 दिनों तक सजेगी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की भव्य मड़ई

राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा, कला और ग्रामीण जीवन की जीवंत विरासत को सहेजने एवं नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से “राजनांदगांव मड़ई – हमर माटी के मड़ई तिहार” का भव्य आयोजन 15 मई से 24 मई तक किया जा रहा है। 10 दिवसीय यह सांस्कृतिक महोत्सव प्रदेश की माटी की खुशबू, लोक जीवन की सादगी और छत्तीसगढ़ी अस्मिता को समर्पित रहेगा।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए ऑल वॉलंटरी एसोसिएशन फाउंडेशन (ALLVA Foundation) के डायरेक्टर एवं चेयरमैन डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि संस्कृति, भाईचारे और लोक जीवन की अनमोल विरासत का प्रतीक है। बदलते आधुनिक दौर में लोक संस्कृति और परंपराएं प्रभावित हो रही हैं, ऐसे समय में “हमर माटी के मड़ई तिहार” जैसे आयोजन सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

उन्होंने कहा कि मड़ई तिहार सदियों से छत्तीसगढ़ की सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है। गांवों में लगने वाली मड़ई केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोक जीवन की आत्मा का उत्सव होती है। इस आयोजन में ग्रामीण परिवेश की परंपराएं, लोकगीत, लोकनृत्य और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की विविधता को मंच मिलेगा।

डॉ. साहू ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम कराना नहीं, बल्कि समाज में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व और आत्मीयता की भावना जगाना है। उन्होंने युवाओं से अपनी जड़ों, परंपराओं और लोक संस्कारों से जुड़ने का आह्वान किया।अलवा फाउंडेशन के फाउंडेशन होमन देशमुख ने कहा कि यह आयोजन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। गांवों और कस्बों में छिपी प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से लोक कलाकारों, शिल्पकारों, पारंपरिक वाद्य यंत्र कलाकारों और स्वयं सहायता समूहों को इस मड़ई तिहार में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाएगा।

10 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में पंथी, करमा, सुवा और राऊत नाचा जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों के साथ लोकगीतों की आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताएं, हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल, सांस्कृतिक परिचर्चाएं तथा बच्चों और युवाओं के लिए विशेष प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।

महोत्सव में प्रदेशभर से लोक कलाकार, सांस्कृतिक दल और ग्रामीण प्रतिभाएं शामिल होकर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन स्थल को पारंपरिक छत्तीसगढ़ी शैली में सजाया जाएगा, जिससे लोगों को गांव की मड़ई और लोक जीवन का वास्तविक अनुभव मिल सके।आयोजकों के अनुसार यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास और सांस्कृतिक संवर्धन जैसे विषयों को भी प्रमुखता से सामने लाएगा।

कार्यक्रम में स्थानीय युवाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।डॉ. हेमशंकर जेठमल साहू ने जिलेवासियों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और कला प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर अपनी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण में सहभागी बनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जब समाज अपनी संस्कृति से जुड़ा रहता है, तभी उसकी पहचान और आत्मा जीवित रहती है।“राजनांदगांव मड़ई – हमर माटी के मड़ई तिहार” को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने वाला ऐतिहासिक आयोजन माना जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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