नारी शक्ति का विराट स्वर: सम्मान, सुरक्षा और अधिकार के लिए उठी एकजुट आवाज – कीर्ति नायक

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर आज नारी शक्ति के अद्भुत उत्साह, आत्मविश्वास और एकजुटता की साक्षी बनी, जब हजारों की संख्या में मातृशक्ति ने ऐतिहासिक महिला जनआक्रोश रैली में भाग लिया। यह केवल एक रैली नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के लिए उठी एक सशक्त आवाज थी, जिसमें हर महिला की उम्मीद, संघर्ष और संकल्प स्पष्ट रूप से झलक रहा था।

इंडोर स्टेडियम से प्रारंभ होकर जयंती स्टेडियम रायपुर में आयोजित विशाल सभा तक पहुंची इस रैली में पूरे प्रदेश से आई महिलाओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की और यह संदेश दिया कि अब नारी अपने अधिकारों के लिए जागरूक, संगठित और संकल्पित है।

कार्यक्रम में किरण सिंहदेव एवं विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति रही। साथ ही महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, सांसदगण, विधायकगण, मंत्रीगण एवं भाजपा के प्रदेश, जिला और मंडल पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

रैली में शामिल महिलाओं ने अपने आत्मसम्मान और अधिकारों के समर्थन में एकजुट होकर बुलंद स्वर में अपनी बात रखी। इस विषय पर अपनी भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष श्रीमती कीर्ति नायक ने कहा कि “नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की शक्ति है। जब तक महिलाओं को समान अधिकार और निर्णय लेने में उचित भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक सशक्त समाज की परिकल्पना अधूरी रहेगी।” उन्होंने कहा कि 33% आरक्षण महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन विपक्ष के सहयोग के अभाव में यह अभी तक साकार नहीं हो सका।

सभा को संबोधित करते हुए किरण सिंहदेव ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना समृद्ध और विकसित समाज की कल्पना संभव नहीं है। वहीं विष्णु देव साय ने महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित हजारों महिलाओं ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि वे अपने अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए सदैव एकजुट रहेंगी और हर स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगी।

यह रैली छत्तीसगढ़ में नारी शक्ति की जागरूकता, एकता, आत्मसम्मान और अधिकारों के प्रति अटूट विश्वास का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई है।

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