जनपद पंचायत पाटन के चक्कर काट रहे हितग्राही, जनप्रतिनिधियों ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

रानीतराई। पाटन विकासखंड के ग्रामों में पिछले करीब पांच महीनों से सामाजिक सुरक्षा पेंशन का वितरण नहीं होने से गरीब विधवा एवं वृद्धजन भारी परेशानी झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि पेंशन के सहारे दवा-इलाज और रोजमर्रा का खर्च चलाने वाले हितग्राही अब जनपद पंचायत के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जनपद सदस्य रश्मि भेदप्रकाश वर्मा ने इस मामले को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि गरीबों को मिलने वाली मासिक पेंशन बंद होना उनके अधिकारों पर सीधा प्रहार है। वर्मा के अनुसार, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को प्रतिमाह ₹500 की पेंशन मिलती थी, जिससे वे किसी तरह अपना गुजारा कर लेते थे।
बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर
पेंशन बंद होने का सबसे अधिक असर 80 से 90 वर्ष तक के बुजुर्गों पर पड़ रहा है। कई वृद्धजन इलाज और दवाइयों के लिए पूरी तरह इस राशि पर निर्भर थे। अब उन्हें आर्थिक संकट के साथ-साथ शारीरिक परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।
वर्मा ने बताया कि कई हितग्राही अपनी समस्या लेकर बार-बार जनपद पंचायत पाटन पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
आंदोलन की चेतावनी, फिर भी नहीं सुनवाई
स्थानीय स्तर पर लगातार आंदोलन की चेतावनी दी जा रही है, इसके बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
पुरानी गरीबी रेखा सूची बनी बड़ी बाधा
विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू ने कहा कि पेंशन योजनाओं में वर्ष 2007-08 की गरीबी रेखा सूची को अनिवार्य किए जाने के कारण बड़ी संख्या में पात्र लोग योजना से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई ऐसे परिवार हैं जो वास्तव में गरीब हैं, लेकिन पुरानी सूची में नाम नहीं होने के कारण उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
18 साल बाद भी नहीं हुआ नया सर्वे
साहू ने सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2007-08 में किए गए सर्वे की वैधता अब समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार हर 10 वर्षों में नया सर्वे होना चाहिए, लेकिन लगभग 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद नया सर्वे नहीं कराया गया।
उन्होंने इसे सरकार की उदासीनता और लेटलतीफी बताते हुए जल्द से जल्द सर्वे कराकर पात्र हितग्राहियों को पेंशन का लाभ देने की मांग की है।

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