- प्रस्तावित व्यवस्था में अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों की अनदेखी -अशोक साहू

रानीतराई।केंद्र में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर भारतीय संसद में हुए घटनाक्रम पर पाटन जनपद सदस्य रश्मि वर्मा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि केंद्र की भाजपा सरकार महिलाओं के नाम पर संविधान की मूल भावना से छेड़छाड़ करने का प्रयास कर रही थी,जिसे विपक्ष के सशक्त विरोध ने विफल कर दिया।वर्मा ने कहा कि संसद में जो घटनाक्रम हुआ,उसने देश के सामने सच्चाई उजागर कर दी है।उनके अनुसार यह विधेयक वास्तविक महिला सशक्तिकरण के बजाय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को कमजोर करने का प्रयास था,महिला आरक्षण पर मोदी सरकार की नियत साफ नहीं है।
अशोक साहू विधायक प्रतिनिधि व पूर्व उपाध्यक्ष जिपं.दुर्ग ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था में अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों की अनदेखी की जा रही थी,जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है।इस तरह का प्रावधान समाज के विभिन्न वर्गों के बीच असंतुलन पैदा कर सकता था।साहू ने कहा कि नेता विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने इस मुद्दे को मजबूती से उठाया और सरकार को बैकफुट पर आने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विधेयक नहीं था, बल्कि संविधान के मूल ढांचे को प्रभावित करने का प्रयास था,जिसे विपक्षी दलों ने मिलकर रोका।उन्होंने आगे कहा कि देश की जनता अब जागरूक है और संविधान के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोशिश को स्वीकार नहीं करेगी।कांग्रेस पार्टी हमेशा से देश को जोड़ने और सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध रही है। सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी।
