सचिव साहब पर शासकीय भूमि कब्जाने का आरोप, पंडरीपानी राजस्व क्षेत्र में मकान निर्माण को लेकर उठ रहे कई सवाल,,

खबर,, हेमंत तिवारी,,,,,,,

छुरा /ब्लॉक मुख्यालय छुरा से लगे ग्राम पंडरीपानी के राजस्व एवं वन क्षेत्र में बीते कुछ समय से अवैध कब्जे की गतिविधियों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर से सटे इस क्षेत्र में धीरे-धीरे शासकीय जमीनों पर कब्जा करने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है, जहां बिना किसी स्पष्ट अनुमति के लोग मकान, बाउंड्री वॉल और अन्य निर्माण कार्य करते नजर आ रहे हैं। इस स्थिति को लेकर आम नागरिकों में चिंता भी दिखाई दे रही है, क्योंकि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगाई गई तो भविष्य में शासकीय भूमि का बड़ा हिस्सा निजी कब्जों में जा सकता है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा को और तेज कर दिया है। जानकारी के मुताबिक पंचायत सचिव के पद पर कार्यरत टीकमचंद साहू पर आरोप लगाया जा रहा है कि उनके द्वारा छुरा नगर से लगे पंडरीपानी की सीमा पर स्थित एक बड़े भू-भाग पर कब्जा कर मकान एवं बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया है। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर निर्माण कार्य किया गया है वह राजस्व क्षेत्र से जुड़ी भूमि बताई जा रही है, जिसके कारण यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जिस क्षेत्र में यह निर्माण किया गया है उसके आसपास आदिवासी समुदाय की जमीनें भी स्थित हैं। कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि समीप के आदिवासी भूमि के एक हिस्से को नियमों में कथित तौर पर फेरबदल कर खरीदा गया और उसके बाद उस पर मकान निर्माण कर दिया गया।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि कोई सामान्य व्यक्ति शासकीय भूमि पर कब्जा करता है तो प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाती है, लेकिन यदि इस तरह के आरोप किसी शासकीय कर्मचारी पर लगते हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच और भी जरूरी हो जाती है। लोगों का कहना है कि शासन से वेतन लेने वाला कोई भी कर्मचारी यदि शासन की ही संपत्ति से जुड़े विवादों में घिरता है तो यह व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा विषय बन जाता है।बताया जाता है कि पंडरीपानी डिही क्षेत्र नगर मुख्यालय के पास स्थित होने के कारण यहां जमीन की मांग भी लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से बीते कुछ वर्षों में यहां जमीन से जुड़े विवाद और कब्जे की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजस्व और प्रशासनिक अमला समय-समय पर जमीनों की स्थिति का निरीक्षण करे और अवैध कब्जों पर सख्ती से कार्रवाई करे तो इस तरह की स्थितियों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

,,,,,इस पूरे मामले में जब पंचायत सचिव टीकमचंद साहू से उनका पक्ष जाना गया तो उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यह मामला अभी का नहीं बल्कि लगभग पांच वर्ष पुराना है। उन्होंने बताया कि जिस जमीन की बात की जा रही है वह ग्राम पंचायत खरखरा की जानकारी में है और उस जमीन पर उनका अधिकार है,। सचिव टीकमचंद साहू ने यह भी बताया कि जमीन से जुड़े इस पूरे प्रकरण की जांच पूर्व में राजस्व विभाग द्वारा की जा चुकी है। उनका कहना है कि जांच के बाद भी स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, इसलिए उन पर लगाए जा रहे आरोप सही नहीं हैं।फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यदि इस मामले को लेकर प्रशासन के पास कोई शिकायत या आपत्ति पहुंचती है तो संबंधित विभाग द्वारा क्या जांच की जाती है और वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस प्रकार के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है ताकि शासकीय भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और आम लोगों के बीच किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति न रहे

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