हड़बड़ी में बना दिया सामुदायिक पट्टा… वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे दो पंचायतों के सैकड़ों ग्रामीण

? रिपोर्टर:-विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद ब्यूरो

आज पूरे विश्व मे आदिवासी दिवस,,मूलनिवासी समुदाय बड़ी धूमधाम से सैद्धांतिक नियमों के तहत मना रहा हैं। राज्य,देश के लिए अहम योगदान देने वाले मूलनिवासी समुदाय के अमर वीरों को कोई नहीं भुलाया जा सकता।आज  जल,जंगल, जमीन, जैव विविधता, वनों की संरक्षण संवर्धन मे जिन आदिवासियों ने अहम भूमिका निभाई है। उसके वंशज वन विभाग के भयंकर लापरवाही,गड़बड़ी करने  के कारण बेहद परेशान बेबस और लाचार है। विश्व आदिवासी दिवस के दिन तमाम विद्वानों से न्याय की गुहार आदिवासी समुदाय ने लगाई है।
उदंती वन मंडल तौरेंगा परिक्षेत्र बफर जोन उड़ीसा सीमा पर बसा हुआ छत्तीसगढ़ के ग्राम गरीबा जहां से लगा हुआ ग्राम पंचायत साहेबिनकछार के आश्रित ग्राम  कोदोमाली के पारा ईचरादी,दसपुर के सैकड़ों आदिवासियों ने वन विभाग तौरेंगा परिक्षेत्र के भयंकर लापरवाही एवं गड़बड़ी करने के कारण खामियाजा भुगतने को मजबूर हैं। बरसों से काबिज इचरादी,दसपुर के सैकड़ों आदिवासियों के बसाहट खेत,खलियान जहाँ पर खेती कर रहे हैं।उन लोगों का पात्रता के आधार पर व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र नहीं देते हुए वन विभाग ने भयंकर गड़बड़ी करते हुए गरीबा को निस्तार एवं चारागाह के लिए समुदायिक पट्टा बना कर दे दिया गया। खेत, खलियान,मकान को भला गाय बैल कैसे खाएंगे। निस्तार और चारागाह जंगलों से होता है।कि खेत खलियान मकान से। जिसके कारण ग्रामीणों को भयंकर डर सता रहा है।वन विभाग के द्वारा भयंकर लापरवाही करने के कारण सैकड़ों आदिवासियों को नैसर्गिक अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है।जिसका जिम्मेदार कौन होगा।
साहेबिनकछार के सरपंच कैलाश नेताम व ग्रामीणों के बताए अनुसार इचरादी,दशपुर ग्राम पंचायत साहेबिनकछार के अंतर्गत आता है। जबकि साहेबिनकछार की दूरी वहां से लगभग 8किलोमीटर होगा। और वहां से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर बसा ग्राम गरीबा है। जो कोचेंगा पंचायत के अंतर्गत आता है। जिस जगह में सैकड़ों आदिवासी निवास करते हुए खेती कर रहे हैं ।जो ग्राम गरीबा जंगल के कंपार्टमेंट में आता है। वन विभाग तौरेंगा परिक्षेत्र के द्वारा सैकड़ों आदिवासी जिस जगह पर वर्षों से घर बनाकर खेती कर रहे हैं। सभी को वन विभाग गरीबा ग्राम सभा के नाम से 2116 में लगभग 600 से 700 एकड़ का समुदायिक पट्टा बना दिया गया। वन अधिकार के लिए 2 गांव के बीच विवाद की स्थिति होने पर दोनों ग्राम सभाओं में उचित निर्णय लेते हुए समाधान के दिशा में कार्य किया जाता है। ग्राम सभा में समाधान की स्थिति नहीं होने पर उच्च अधिकारियों से सलाह मसविरा करते हुए उचित निराकरण किया जाना आवश्यक होता। लेकिन वन विभाग के द्वारा अचानक भयानक बिना ग्राम सभा से सलाह लिए एक पक्षीय खेत,खलियान,मकान को भी जंगल बताकर समुदायिक पट्टा बना दिए जाने का ग्राम पंचायत साहेबिन कछार विरोध कर रहा है।
वन मंत्री के दरबार में न्याय की गुहार लगाने पहुंचेंगे सैकड़ों आदिवासी परिवार

वन अधिकार से वंचित इचरादी दसपुर के सैकड़ों ग्रामीण वन विभाग तौरेंगा परिक्षेत्र के लापरवाही और गलत ढंग से सामुदायिक वन अधिकार पत्र बनाए जाने के मामले को लेकर बहुत जल्द वन मंत्री के दरबार में पहुंचकर सैकड़ों आदिवासी परिवार न्याय की गुहार लगाने की बात कही है।

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