मनुष्य जीवन को भक्ति सेवा व सत्कर्मों से सार्थक बनाया जा सकता है ः पं. सुरेश शर्मा

श्रीमद् भागवत कथा – क्षेत्र के बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं बुजुर्गों ने मिलकर कथा श्रवण का लाभ लिया

देवरीबंगला/ग्राम खपराभाट में देवांगन परिवार द्वारा आयोजित आठ दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन पं. सुरेश शर्मा ने श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन पर श्रद्धालु जमकर नाचने लगे।

पं. सुरेश शर्मा ने कहा कि धर्म बढ़ता है सब भगवान आते हैं। जब जब धरती पर धर्म एवं अत्याचार बढ़ता है तब तब भगवान अवतार लेते हैं। और अधर्म एवं अत्याचार का नाश कर धर्म की स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा कि जब कंस का अत्याचार धरती पर बढ़ने लगा तब श्री कृष्णा ने अवतार लिया। जैसे ही श्री कृष्ण का जन्म हुआ कथा पंडाल में श्रद्धालुओं द्वारा खुशी मनाई गई। इस दौरान श्रद्धालु झूमते थिरखते हुए मंगल गीत गाने लगे।

पंडित शर्मा ने कहा कि बुरा खान-पान, गलत वाणी, लालच का त्याग करना ही सन्यास है। अच्छा बोलना अच्छा खाना अच्छा कर्म करना यह आपकी कला नहीं है यह भगवान की दया दृष्टि से आपको विवेक मिला है। जो कर्म बिना विचार केवल अज्ञान से आरंभ हो वह तामस कर्म कहलाता है। समय हमारे विपरीत हो तब भी साधना कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अहंकार से मुक्त होने पर ही मनुष्य को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

पंडित जी ने श्री कृष्ण जन्म की कथा के ध्रुव चरित्र एवं प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाई। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के प्रमुख यजमान टोमनलाल – मीरा देवांगन, अर्जुन लाल – माहेश्वरी देवांगन, गौतम सिंह – माधुरी देवांगन एवं तुलसीराम – सती देवांगन है।

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