आज अनंत चतुर्दशी तथा कल 12 बजे तक गणेश विसर्जन हो-सूतक व ग्रहण काल में मूर्ति रखना अमंगलकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में अति उत्साह के साथ गणेश स्थापना, पूजन व विसर्जन झांकी का आयोजन आदिकाल से किया जा रहा है। क्योंकि इस वर्ष खग्रास चंद्र ग्रहण है, इसलिए गणेश मूर्ति स्थापना करने वाले श्रद्धालुओं, गणेश उत्सव समितियों से आग्रह है कि आज 6 सितंबर शनिवार अनंत चतुर्दशी के दिन तथा कल 7 सितंबर रविवार दोपहर 12 के तक ही मूर्ति का विसर्जन कर देवें।

सतबहिनियां माता मंदिर के आचार्य पं विजय कुमार झा ने कहा है कि इस वर्ष कल 7 सितंबर रविवार को खग्रास चंद्र ग्रहण भाद्र पद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को है। ग्रहण काल में शास्त्रीय प्रमाण के अनुसार सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पूर्व तथा चंद्र ग्रहण में 9 घंटे पूर्व सूतक लग जाता है तथा देवस्थानों में देवताओं के पट बंद हो जाते हैं। पूजा,आरती,भोग, देव स्पर्श आदि वर्जित रहते हैं।

यहां तक गर्भवती महिलाएं व पशुओं को भी ग्रहण काल में घर से बाहर नहीं निकलने दिया जाता तथा ग्रहण के स्पर्श एवं दर्शन से सुरक्षित रखा जाता है। इसलिए इस चंद्र ग्रहण में 7 सितंबर रविवार को दोपहर 12:57 बजे सूतक प्रभावशील हो जाएगा। क्योंकि चंद्र ग्रहण रात्रि 9 बजकर 57 मिनट में स्पर्श तथा मोक्ष रात्रि 1 बजकर 26 मिनट में होगा। सूतक के दौरान मूर्ति को रखना, शास्त्रगत दृष्टिकोण से अलाभकारी, अमंगलकारी है।

इसलिए आज 6 सितंबर शनिवार की रात्रि तथा 7 सितंबर दोपहर 12 बजे के पूर्व स्थापित गणेश मूर्तियां विसर्जन हो जाना चाहिए। इस संबंध में आचार्य, पंडित, पुरोहित भी सावधान रहें। लोगों का यह कुतर्क रहता है कि छोटी मूर्ति विसर्जित कर दिए, बड़ी मूर्ति के लिए लागू नहीं होगा। यह अमान्य व हानिकारक है। मूर्ति चाहे छोटी हो या बड़ी हो हमारे पूर्वज मंदिरों में या घरों में चलायमान मूर्तियों को सूतक काल में शुद्ध जल में गंगाजल डालकर, कुश डालकर, उसे सूतक काल से ग्रहण मुक्त होते तक डूबा कर रखते हैं। क्या गणेश की मूर्ति को डूबा कर रखना संभव है। ऐसा संभव नहीं है। इसलिए आज 6 सितंबर शनिवार अनंत चतुर्दशी के दिन ही छत्तीसगढ़ में गणेश विसर्जन हो।

आगामी 8 सितंबर को झांकी जुलूस आदि प्रदर्शन के कारण सनातन हिंदू धर्म के विपरीत कार्य है। इससे स्वयं को राज्य व देश को क्षति होती है। यदि कोई आचार्य पंडित पुरोहित ग्रहण काल में गणेश की मूर्ति को रखा जा सकता है, ऐसा कहे तो कृपया उनसे शास्त्र गत प्रमाण मांगा जाए कि ऐसी व्यवस्था किस ग्रंथ के किस पृष्ठ या श्लोक में वर्णित है, उसे धर्म प्रिय श्रद्धालु जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जावे।

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