- मानस दर्शन – जीवन अर्पण पर 25 दिवसीय ऑनलाईन,नवोदित मानस व्याख्यान प्रशिक्षण कार्यशाला एवं परिचर्चा का निःशुल्क आयोजन हुआ
पाटन। आधुनिक भोग एवं भौतिकतावादी दुनिया मे मानो सब कुछ मानवीय संवेदना एवं व्यवहार से ओझल दिखाई पड़ रहा है। इसमे सनातन धर्म संस्कृति दर्शन, साहित्य, ग्रंथ का अध्ययन, चिंतन मनन भारतीय ग्राम्य संस्कृति से दुर होते जा रहा है।
ऐसे मे छत्तीसगढ़ स्तर पर रामायण प्रेमियों के द्वारा एक मानस परिक्रमा, संकल्पना की गई है जिसे मानस दर्शन – जीवन अर्पण नाम दिया गया है। राज्य स्तरीय 25 दिवसीय आनलाइन,नवोदित मानस व्याख्यान प्रशिक्षण कार्यशाला एवं परिचर्चा का निःशुल्क आयोजन किया गया है। इसका प्रथम चरण 11 जून से प्रारंभ हुआ है और 5 जुलाई को प्रशिक्षण का समापन हुआ। आयोजन समिति के अनुभवी, स्थापित मानस मर्मज्ञों द्वारा व्याख्यान के लिए रामचरित मानस के दोहा,चौपाई का चयन कर नवोदित मानस चिंतकों को संप्रेषित किया जाता है जिसके ऊपर 30 मिनट के निर्धारित समय पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए जाते हैं। तत्पश्चात व्याख्यान पर समीक्षा की जाती है । इस तरह रामायण के ८४ दोहा चौपाई पर यात्रा की गई।

वक्ताओं ने अपने मानस चिंतन से भारतीय सनातन धर्म के प्रत्येक पहलू को छुते हुए आध्यात्मिक महत्व का बखान किए। मानस की दोहा ” सेतु बांधि कपि सेन जिमि, उतरे सागर पार ” पर चिंतन प्रस्तुत करते हुए मानस व्याख्याकार छन्नूलाल साहू ने सेतु की आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भगवान राम, कृष्ण और भगवान महावीर स्वामी अपने आप मे सेतु थे । जिन्होंने समस्त संसार के लोगों को सिखाया कि सात्विक, दैवीय, लौकिक आचार, विचार, व्यवहार करते हुए कैसे भगवत शरणागति प्राप्त की जा सकती हैं और इन दैवीय शक्तियों ने विहार,विचरण,भ्रमण से मानवता की श्रृंखला जोड़ते हुए सामाजिक एकता, सदभावना, समरसता का सिद्धांत प्रस्तुत कर लोककल्याण मार्ग का पथ प्रशस्त किया।
मानस दर्शन, जीवन अर्पण पटल समाज मे रामचरित मानस के चिंतन मनन विश्लेषण गायन से उत्कृष्ट साहित्य के प्रति युवाओं को आकर्षित करने के लिए इच्छुक आध्यात्म प्रेमी, साहित्य प्रेमी, समाज सेवी, बौद्धिक और शैक्षिक क्षेत्र मे एक अनुपम परिवेश उपलब्ध कराने के लिए कृतसंकल्प होकर ऐसे आयोजन की निरंतरता बनाए रखने के लिए भरसक प्रयास कर रही है।
मानस दर्शन,जीवन अर्पण, के युवा प्रकल्प के प्रभारी एवं मानस मर्मज्ञ, व्याख्याता हितेंद्र साहू ने बताया कि इस पटल के माध्यम से बाल्मीकि रामायण,तुलसी रामचरित मानस, और अन्य धर्म ग्रंथों के अध्ययन से नवोदित व्याख्याकारों, कलाकारों को अपनी छुपी प्रतिभा को धार देने का एक एक सुंदर अभियान हैं इससे समाज मे वैदिक साहित्य एवं संस्कृति के प्रति लोगों लगाव बढ़ेगा। ऐसे आयोजन भविष्य मे अपने नए नए स्वरूप के साथ निरंतर जारी रहेगा।
पटल के संस्थापक एवं मानस मर्मज्ञ दीपक गुहा ने ८४ दोहा चौपाई प्रखंड पर प्रस्तुत किए गए व्याख्यान को संग्रहित कर ई बुक का निर्माण कर नवोदित व्याख्याकारों को उपलब्ध कराएं हैं।
मानस परिक्रमा संकल्पना के इस अभियान मे रामायण के विशेष जानकार अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन निरंतर रहा है जिनमें नीलकंठ ठाकुर, वेदराम साहू, चैतराम साहू, पुनेश्वर साहू, कुंभकरण सिंहा, रामकुमार साहू, रविना रावटे, संदीप ठाकुर, हिमांचल साहू, माधोराम साहू, पीराराम शर्मा,आर के प्रजापति, रोहित देशमुख, त्रेता चंद्राकर, दामिनी साहू, महाराज निषाद, सरस्वती साहू एवं पटल पर प्रतिदिन जुड़ने वाले एक सौ से अधिक मानस कारों ने उपस्थिति प्रदान किए।
