हेमशंकर जेठमल साहू को “भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया



मुंबई। भारत की सांस्कृतिक राजधानी मानी जाने वाली मुंबई में “अखिल भारतीय प्रतिभा प्रेरणा महोत्सव 2025” का आयोजन गौरवपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन देश भर की विविध प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने, साहित्य एवं कला के संरक्षण, सामाजिक योगदानों के सम्मान एवं राष्ट्रीय एकता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।

इस वर्ष का महोत्सव विशेष रहा, क्योंकि छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से जुड़े समाजसेवी, सांस्कृतिक प्रेरक एवं जननेता हेमशंकर जेठमल साहू को “भारत गौरव पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें ग्रामीण नेतृत्व, महिला सशक्तिकरण, बाल अधिकार, किसान संगठन निर्माण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में उनके समर्पणशील कार्यों के लिए प्रदान किया गया।

प्रमुख आकर्षण:
यह गरिमामय आयोजन मुंबई के प्रतिष्ठित सावरकर सभागृह, दादर में संपन्न हुआ। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ महोत्सव के मुख्य संयोजक एडमिरल क्रांति महाजन के संबोधन से हुआ, जिसमें उन्होंने कहा, “प्रतिभा प्रेरणा महोत्सव केवल सम्मान देने का मंच नहीं, बल्कि यह भारत के विचारों, कलाओं और सामाजिक मूल्यों का उत्सव है।”

इस अवसर पर विविध भाषाओं और विधाओं में लिखी गई पुस्तकों का विमोचन एवं वितरण भी किया गया। साहित्य, पर्यावरण, योग, शिक्षा, लोकसंस्कृति एवं प्रेरक व्यक्तित्वों पर आधारित पुस्तकों को देशभर से आए विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं पाठकों के बीच वितरित किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम:
महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोकनृत्य, शास्त्रीय गायन, वादन और नाट्य प्रस्तुतियाँ दीं। महाराष्ट्र के लावणी, छत्तीसगढ़ का पंथी, असम का बिहू, उत्तराखंड का झोड़ा, और कर्नाटक की यक्षगान जैसे प्रदर्शन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण बने। कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को भारत की सांस्कृतिक विविधता और उसकी जीवंतता का अनुभव कराया।

पुरस्कार वितरण समारोह:
“भारत गौरव पुरस्कार” से हेमशंकर जेठमल साहू को सम्मानित करते हुए आयोजकों ने कहा कि उनका कार्य ग्रामीण भारत की आत्मा से जुड़ा हुआ है, और वह समाज के उन वर्गों की आवाज़ बन चुके हैं जो प्रायः हाशिए पर होते हैं।

पुरस्कार में उन्हें प्रशस्ति-पत्र, शॉल, स्मृति चिन्ह एवं ₹51,000/- की सम्मान राशि प्रदान की गई। श्री साहू ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा, “यह पुरस्कार उन ग्रामीण समुदायों और महिला समूहों को समर्पित है, जिन्होंने परिवर्तन को अपनाया और स्वयं सशक्त बनने की दिशा में आगे बढ़े। मैं इस आयोजन समिति का आभार प्रकट करता हूँ जिसने मेरे कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी।”

राष्ट्रीय चेतना का संदेश:
पूरे आयोजन के दौरान यह स्पष्ट रूप से अनुभव किया गया कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएं आज भी समाज में सक्रिय हैं और नई पीढ़ी में उनकी गहरी जड़ें हैं। साहित्यिक विमर्श, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और सामाजिक विचारों के आदान-प्रदान ने यह सिद्ध किया कि यह मंच न केवल प्रतिभाओं को सम्मानित करता है, बल्कि उन्हें प्रेरित भी करता है।

कार्यक्रम में उपस्थिति:
कार्यक्रम में देश के विभिन्न कोनों से आए वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकार, कलाकार एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। समापन सत्र में “जन गण मन” के साथ राष्ट्र को समर्पित यह आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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