खबर हेमंत तिवारी
पाण्डुका/ समीपस्थ ग्राम रजनकटा में यादव परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा दौरान भगवताचार्य पं ऋषिकेश तिवारी द्वारा प्रभावी कथा वाचन किया जा रहा है जिसमें आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में कथा श्रवण का लाभ ले रहे हैं। आयोजन की शुरुआत शनिवार 10 मई को कलश यात्रा गोकर्ण पूजा के साथ हुआ जिसमें लगातार सुखदेव जन्म बाराह अवतार परीक्षित जन्म और तीसरे दिवस रविवार को सति चरित्र जडभरत कथा और भक्त ध्रुव की कथा कही। सती और जड़भरत की भागवत कथाएं हिंदू धर्म में दो महत्वपूर्ण कथाएं हैं

जो भागवत पुराण में वर्णित हैं। सती की कथा भगवान शिव के प्रति उनकी अटूट भक्ति और त्याग को दर्शाती है, जबकि जड़भरत की कथा जीवन के सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त करने और एकाग्रता के महत्व को दर्शाती है। सती, भगवान शिव की पत्नी और राजा दक्ष की सबसे छोटी बेटी थीं। सती की भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने अपने पिता के द्वारा किए गए अपमान को सहन नहीं किया और अग्नि में प्रवेश करके अपनी जान दे दी। सती की इस कथा में उनकी अटूट भक्ति और त्याग की कहानी को दर्शाया गया है।जड़भरत की कथा: जड़भरत एक महान राजा थे जो अपने ज्ञान और भक्ति के लिए जाने जाते थे।

वे मृग के छौने में तन्मय हो गए थे, जिसके कारण उनका ज्ञान अवरुद्ध हो गया था और वे जड़वत् हो गए थे। इस कथा में जीवन के सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त करने और एकाग्रता के महत्व को दर्शाया गया है। पं तिवारी ने ब्यास मंच से आग्रह किया कि आज समाज में लोग कुसंस्कारों से ग्रसित हो रहे हैं इस समय हमें भावी पीढ़ी को पिता उतानंँपाद और माता सुरुचि के समान अपने संतानों को संस्कारित करने की आवश्यकता है तभी हमारा समाज स्वच्छ और स्वस्थ समाज का निर्माण हो सकता है। कार्यक्रम का आयोजन अपने माता स्व. रामकुंवर बाई यादव के बरसी श्राद्ध में उनके पुत्र खेमलाल यादव एवं वेदप्रकाश यादव, लक्ष्मी कांत यादव एवं यादव परिवार द्वारा किया गया है।
