रानीतराई। असोगा में बिकने वाली अमानक कच्ची शराब से परेशान ग्रामीणों व अंचलवासियों विरोध कर शासन से बंद करने की मांग कई सालों से किया जा रहता था लेकिन अवैध अमानक शराब की बिक्री बंद नहीं हो रही थी जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। परेशान होकर शासन से ग्राम में शासकीय शराब दुकान खोलने की मांग कर असोगा पंचायत से प्रस्ताव कर ग्राम से दूर निजी जगह पर खोलने की अनुमति शासन को दिए। जिस पर अन्य गांव जरवाय के ग्रामीण विरोध भी किए लेकिन शासन प्रशासन के संरक्षण में शासकीय शराब दुकान संचालय हो गई। जिसका परिणाम भी अच्छा देखा गया। अब गांव में अमानक अवैध शराब की बिक्री बंद हो गई। युवा बच्चों व ग्रामीणों को सुबह से कम पैसे में अमानक शराब पीने नहीं मिलने से माहौल शांत हो गया और गांव के अनेक लोगों को रोजगार भी मिला। ग्रामीण को कोई शिकायत नहीं होने से शासकीय शराब दुकान असोगा निर्बाध रूप से चल रही है लेकिन पंचायत चुनाव के बाद सरपंच व पंच बदलने से राजनीतीकरण के कारण इसका विरोध करना प्रारंभ हो गया है। और गांव से दूर संचालित शराब दुकान को गांव के समीप निस्तारी तालाब के पार में जहां शासकीय रतनजोत के पेड़ लगे है वहां लाने की तैयारी कर पंचायत अब गांव का माहौल को गरम कर अशांत करने में लगे है जिससे गांव व अंचल में तनाव बढ़ने लगा है।

विदित हो कि असोगा में विगत 30 वर्षों से बन रहे अवैध महुआ कच्ची शराब से परेशान ग्रामवासियों ने पंचायत एवं ग्राम सभा के माध्यम से गांव में शासकीय शराब दुकान खुलवाया।जिसे विफल करने कच्ची शराब विक्रेताओं द्वारा अनेक प्रयास किए। लेकिन सफल नहीं हुए और गांव से पर्याप्त दूरी पर शासकीय शराब दुकान खुला। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गांव में काफी हद तक शांति कायम हुआ। लेकिन इस बीच पंचायत चुनाव में नव निर्वाचित सरपंच और कुछ पंचों ने कच्ची शराब विक्रेताओं के दबाव में शराब दुकान को स्थानांतरित करके विवाद को बढ़ावा देने तथा इसके लिए तालाब को पाटने और उसमें पूर्व के पंचायत द्वारा लगाए गए रतनजोत सहित अन्य पेड़ -पौधो की बलि चढ़ा रहा है।इससे गांव में आक्रोश का माहौल है जो कभी भी पंचायत व प्रशासन के खिलाफ आंदोलन के रूप में सामने आ सकता है।अब आगे देखना यह होगा कि शासन वर्तमान जगह ही निर्विवाद शासकीय शराब दुकान को संचालित करते हैं कि स्थानांतरित करके विवाद को बढ़ावा देते हैं।
