खबर हेमंत तिवारी
पाण्डुका/आदिवासी विकासखंड छुरा के ग्राम पंचायत तौरंगा में बने आदिवासी बालक छात्रावास जो 2006 में स्वीकृत हुआ था। और लगभग 15 से 20 साल के लंबे वनवास के बाद खंडार में तब्दील हो चुके भवन का जीर्णोद्धार कार्य के तहत टीना शेड का निर्माण कर इस बालक आदिवासी छात्रावास का निर्माण किया गया पर कल गुरुवार को आई आंधी तूफान ने इसके निर्माण और गुणवत्ता की पोल खोल रख दिया घटिया निर्माण की वजह से टीना उखाड़ कर फेंका गया है और आसपास के दीवारों में दरारें आ गया है साथ ही घटिया निर्माण में प्रयुक्त सामग्री बिखरे पड़े हैं

इससे अंदाजा लगाया जा सकता है। कि किस प्रकार आदिवासी आयुक्त विभाग द्वारा संचालित इस आश्रम शाला में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अब प्रश्न उठने लगे हैं। जिसमें संबंधित विभाग के ठेकेदार ,इंजीनियर,अधिकारी सहित तमाम वे लोग जो निर्माण कार्य में देख रेख रहे । उनके कार्य प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

आंधी तूफान लगभग 6 बजे के आसपास आया आश्रम से लगे गांव में कोई हानि नहीं हुई न ही किसी के घर को ऐसा नुकसान हुआ पर शायद ऊपर वाला भी चाहता था।की इसके निर्माण की सच्चाई निकल कर सामने आए।गनीमत रहा कि बालक आदिवासी छात्रावास के बच्चे परीक्षा के बाद घर चले गए थे। नहीं तो बहुत बड़ी अनहोनी घटना हो जाती केवल एक चौकीदार ड्यूटी पर तैनात थे। जो हवा तूफान देख सहम गया था।घटना के बाद साथ इसकी जानकारी तत्काल उन्होंने आश्रम अधीक्षक को दी पर 24 घंटे बाद भी आश्रम अधीक्षक आश्रम शाला को झांकने भी नहीं आया

इस तरह भगवान भरोसे चल रहे। इस आदिवासी छात्रावास का भगवान ही मालिक है।और लंबे अरसे बाद मुश्किल से बने आश्रम शाला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया । इसी का नतीजा है कि केवल खाना पूर्ति के लिए बनाए गए निर्माण कार्य अब क्या दोबारा बन पाएगा या फिर उसके लिए फिर अलग से फंड निकाल कर निर्माण किया जाएगा इस तरह विभाग को बैठे-बैठे और ठेकेदार को बैठे-बैठे कमाई के एक रास्ता मिल गया इसमें फिर लाखों रुपए निकाल कर निर्माण किया जाएगा।
