जल्दबाजी करके आरोपी और अपने कर्मचारियों को बचाने जाँच में जुटी खाद्य विभाग, मात्र खाना पूर्ति रह गई जांच,,

लोकेश्वर सिन्हा के साथ,,,

गरियाबंद । खाद विभाग के खाद्य इंस्पेक्टर सहित शनिवार को दो लोगो का दल राशन कार्ड के लिए रुपये मांगने के सम्बंध में जांच करने बिन्द्रानवागढ़ पहुचे। जाच दल से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि कई समाचार पत्रो में खबर प्रकाशित होने उपरांत कलेक्टर के मौखिक निर्देश पर जांच करना बताया। जबकि इस जांच पर ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं जांच दल ने बिन्द्रानवाढ़ पंचायत में उपलब्ध राशन कार्ड की गिनती की जिसमें भी एक राशन कार्ड कम होने की बात वहां के पंचायत सचिव ने बताई। जांच दल वहां केवल कार्ड से संबंधित औपचारिकताओं को ही पूरा करने पहुंचा था जबकि कार्ड के हितग्राहियों से चर्चा नहीं की इक्का-दुक्का लोगों को बुलाकर पूछा गया कुल मिलाकर मामले का सार यही निकाला जा सकता है की विभाग के अफसर अपने आप को तो बचाने में जुटे ही है और कार्ड बेचने वाले आरोपी व्यक्ति के गिरोह को भी बचना चाहते है।
जिला प्रशासन को चाहिए था कि इस गंभीर मामले में अपर कलेक्टर स्तर की अधिकारी से जांच की जानी थी। जिस अफसर पर दलालों के साथ मिलीभगत का आरोप है उसी अफसर के अधीनस्थ कर्मचारी अपने अफसर के खिलाफ जाकर कैसे जांच करेंगे? यह प्रशासनिक चुनौती है यह तो सर्वविदित है कि खाद्य विभाग से अफसर के कहने पर यह 34 राशन कार्ड किसी अपरिचित व्यक्ति को प्रदान किया गया जो इसे जनपद पंचायत ना ले जाकर सीधे हितग्राही से कार्ड की एवज में मोलभाव करने पहुंच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह फिंगेश्वर का व्यक्ति उरेंद्र साहू जो अपने आप को किसी अखबार का प्रतिनिधि बताता है। जिसे अभियुक्त बनाया जाना चाहिए था साथ ही उसे कार्ड उपलब्ध कराने वाले से लेकर गिरोह के सारे सदस्यो खिलाफ एफ आई आर करते हुए कड़ी कार्यवाही किए जाने कीअनुशंसा किए जाने की जरूरत थी। क्योंकि यह कार्ड विभाग ने अधिकृत व्यक्ति को नहीं दिया था अतः विभाग के भी अफसर की भी गतिविधियों की जांच की जानी थी वही यह तथ्य भी अनदेखा नहीं किया जा सकता कि कहीं अपात्र लोगों को तो राशन कार्ड जारी नहीं कर दिए गए। आखिर सरकारी अतिमहत्वपूर्ण दस्तावेज बाहर कैसे निकले।
प्रशासन अगर गंभीरता से इस मामले की जांच करता है तो अफसर से लेकर राजनीतिक व्यक्ति तक इस जांच के घेरे में आएंगे । इस मसले पर बिंदानवगढ़ क्षेत्र के कार्ड धारियों से बात करने पर उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि आरोपी व्यक्ति द्वारा क्षेत्र में घूम घूम कर लोगों से कार्ड देने की एवज में 2, 2 हजार रुपयो की मांग की गई। एक गरीब महिला के पास से 300 सौ रुपये तक ले लिए गए।
जांच में यह बात भी सामने आनी चाहिए थी की आखिर यह राशन कार्ड जनपद पंचायत ना जाकर सीधे हितग्राही के पास कैसे पहुंचा वही 14 तारीख को खाद विभाग से दिया गया राशन कार्ड 21 तारीख को सचिव के हाथों गांव के किसी व्यक्ति ने कैसे दे दिया 1 हफ्ते तक आखिर राशन कार्ड कैसे कहां और किसके द्वारा रखा गया था कुल मिलाकर मामला दबाने की प्रशासन भरपूर कोशिश कर रहा है और इसमें अपने चहेते अफसर और राजनीतिक आकाओं को खुश करने के प्रयास में जुट गया है।

छ0ग0 सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी दिशा निर्देश अनुसार शासकीय कर्मचारियों के विरूद्ध वित्तीय अनिमितताओं, भ्रष्टाचार एवं अन्य महत्पूर्ण प्रशासनिक मामलों की जॉच करने के लिए उस जिले के किसी डिप्टी कलेक्टर को कलेक्टर की अनुमति से जॉच अधिकारी नियुक्त किये जाने का प्रावधान है। जिसके बावजूद जिस विभाग की शिकायत है उसकी विभाग के अधिकारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया जाना संदेहास्पद प्रतीत होता है।

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