खबर हेमंत तिवारी
राजिम-/ महानदी पुल से आसानी से दिन और रात महानदी की सीना चीरते हुए दर्जनों चैन माउंटेन मशीनों को अवैध रेत उत्खनन करते देखा जा सकता है। पूजनीय धर्म नगरी राजिम में सालों से फल फूल रहे ।यह अवैध कारोबार से सत्ता शासन की जमकर धू धू हो रही है।जो महानदी की आरती तो 15 दिनों तक मेला के दौरान करती है।पर मेला के बाद पूजनीय महानदी आंसू बहाते नजर आती हैं। पर इन सब बातों की फिक्र कौन करता है। राजिम अनुभाग वा तहसील कार्यालय से महज कुछ दूरी पर चल रहा इस अवैध कारोबार से किसका कितना भला हो रहा सबको पता है।ब्लॉक में रेत माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि कुछ ही दिनों पहले हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अब फिर दो अलग-अलग स्थानों पर अवैध रेत उत्खनन बड़े पैमाने पर जारी है। मामला ब्लॉक के ग्राम पितईबंद क्षेत्र का है, जहां महानदी का सीना छलनी कर खुलेआम रेत का खनन हो रहा है।हैरानी की बात यह है कि इसी क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व रायपुर और गरियाबंद की संयुक्त टीम ने छापा मारकर महानदी क्षेत्र में चल रहे अवैध रूप से खनन कर रही मशीनी वाहनों को जब्त करते हुए चैन माउंटेन और हाइवा जैसे भारी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिससे ऐसा लगा कि प्रशासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। लेकिन अब फिर वही खेल शुरू हो चुका है, और इस बार और ज्यादा बेखौफ सिर्फ पितईबंद में ही तीन-तीन चैन माउंटेन लगाकर रेत का बेखौफ उत्खनन किया जा रहा हैं।

एसडीएम ने 24 मार्च को सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी-था। जो महज प्रशासन की रस्म साबित हुआ। लेकिन सरपंच ने अभी तक नोटिस का जवाब एसडीएम कार्यालय में प्रस्तुत नही किया हैं। पिछले साल इसी महानदी क्षेत्र के ग्राम पंचायत परसदा जोशी, हथखोज के सरपंच को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया था। जिस पर परसदा जोशी के सरपंच का जवाब संतोषजनक नही होने पर पंचायतीराज की धारा 40 के तहत एसडीएम ने कार्रवाई करते हुए सरपंच को बर्खास्त किया था। लेकिन फरवरी 2025 में पंचायत चुनाव के बाद फिर से रेत माफिया महानदी तट पर बसे ग्राम पंचायतों के सरपंचों से सांठगांठ कर महानदी के दोनों तरफ सीना छलनी करना शुरू कर दिया हैं। जानकारी के अनुसार अभी ग्राम पंचायत परसदा जोशी और हथखोज के नए सरपंचों ने पिछले कार्रवाई का सबक लेते हुए रेत घाट के स्वीकृति देने में सोचने पर लगे हुए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत पितईबंद के सरपंच द्वारा महानदी से रेत निकालने रेत माफियाओं को स्वीकृति दे दिए हैं। जिस पर रेत माफियाओं द्वारा तीन-तीन चैन माउंटेन लगाकर बेधड़क रेत की चोरी करने में लगे हुए हैं। प्रशासन मौन, कौन दे रहा संरक्षण- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिदिन सैकड़ों हाइवा वाहन पितईबंद घाट से रेत निकालकर राजिम से होकर अवैध रेत लेकर गुजर रहे हैं। इन वाहनों की आवाजाही ना तो छुपी हुई है, ना ही किसी से अनजान। फिर भी न तो परिवहन विभाग हरकत में आ रहा है, न ही पुलिस प्रशासन और न ही खनिज विभाग।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गरियाबंद जिले में कोई वैध रेत घाट स्वीकृत नहीं है, तो फिर इन अवैध रेत घाटों में कार्रवाई क्यों नहीं किया जा रहा हैं। कार्रवाई नही होने से स्पस्ट प्रतीत हो रहा हैं कि इन रेत माफिया और विभाग के बीच तगड़ी सांठगांठ हैं। जिससे ये रेत का अवैध कारोबार फल फूल रहा हैं।तो वही 3 रोज पहले राजस्व विभाग ने तड़के सुबह चौबे बंधा से आ रहे दो हाइवा गाड़ियों पर कार्यवाही कर यह जताने का कोशिश किया था। की हम लोग भी कभी कभी कार्यवाह करते हैं।
