टिकेंद्र वर्मा @रानीतराई।ग्रीष्म कालीन धान की फसल वाली खेतों में चूहों की बढ़ती आबादी ने किसानों की नींद हराम कर दी है। लाख जतन के बाद भी इन पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। चूहे फसल को चट करने लगे हैं। तनाछेदक का प्रकोप के साथ ही चूहों के प्रकोप से धान की फसल चौपट हो रही है। किसान लगातार धान की फसल को बचाने दवा का छिड़काव कर रहे हैं इसके बावजूद नियंत्रण नहीं हो रहा है। तना छेद के प्रकोप से परेशान किसान इसके रोकथाम के लिए हजारों रुपये महंगी दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं लेकिन इसका जितना लाभ मिलना चाहिए, नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने बताया कि खेतों में चूहों के साथ-साथ अब कीट प्रकोप का ग्रहण लग गया है।
आलम यह है कि कई एकड़ खेतों की फसल कीटो व चूहों से बर्बाद हो गई है। जिसमें धान होना तो दूर इसकी कटाई भी किसान नहीं कर पाएंगे।जिसके कारण किसान असमंजस की स्थिति में है और फसल को बचाने तरह-तरह के जुगत लगा रहे हैं।धान की फसलों में ब्लास्ट, तनक छेदक का प्रकोप तेजी से फैलता जा रहा है। लेकिन चूहे पूरी तरह से फसल को चौपट कर रहे हैं। चूहों का आतंक इतना बढ़ गया है कि अब चूहे मारने वाली दवाइयां काम नहीं आ रही हैं।
चूहे से फसल को बचाने के लिए तरह तरह के कर रहे उपाय —–
किसान चूहे की आंतक से फलस को बचाने के लिए कई प्रकार के उपाय कर रहे हैं। पहले दवाई की के माध्यम से चूहे को मारने की उपाय कर रहे दवाई काम नहीं आ रही हैं तो किसानों की चिंता बढ़ने लगी हैं। इस स्थिति मे कई किसान अपने खेतो मे पालीथीन को लकड़ी मे बांध कर लगाने लगे हैं बताते हैं की हवा चलने पर पालीथीन की आवाज मे नहीं आने की अनुमान लगाकर यह उपाय किये हैं. वही निपानी, चुलगहन सहित अन्य गावों के कई किसान खेत के पेड़ो व लकड़ी गढ़ा कर कांच की बोतलो को लटकाये हैं साथ मे उसी के पास लोहे के राड की छोटे छोटे टुकड़े या अन्य वजन वस्तु लटकाये हुए हैं बोतल व लोहे का टुकड़े दोने टकराते हैं तो आवाज निकलते हैं जिससे आवाज सुनकर चूहा फसल मे नहीं आने की अनुमान लगाकर फलस को बचाने उपाय करने मे लगे हैं.क्षेत्र के किसान आशीष वर्मा, रोहित, कृष्ण कुमार साहू ने कहाँ की अब हम लोग इसी प्रकार की देशी उपाय कर चूहों से फसल को बचाने की प्रयास कर रहे हैं, कुछ लाभ भी नजर आ रहा हैं।
कांच की बोतल,लोहे की वस्तु और बांधा पुठ्ठा,अब भाग रहे चूहे
