समय पर धान परिवहन नहीं खरीदी केंद्रों में इस साल रहा लचर व्यवस्था अभी भी बहुत से किसानों ने नहीं बेची है।। ,,अपनी धान,,

खबर हेमंत तिवारी

राजिम/मौजूदा सरकार से इस बार धान खरीदी को लेकर आम जनता जनार्दन ने नाराजगी जताई है।इससे पहले ना तो किसान इतने परेशान नहीं हुए थे ।न ही खरीदी केंद्र में कर्मचारी अधिकारी इस बार जिस हिसाब से खरीदी हुई ।उस हिसाब से खरीदी केंद्रों में धान की उठाओ की गति से समय पर नहीं हुआ जिस कारण अधिकतर खरीदी केंद्रों में जाम की स्थिति बनी हुई है।साथ ही जनवरी महीने में कुछ ही दिन बचे हैं । और खरीदी केंद्रों में आज भी सैकड़ो कुंटल धान अभी तक खरीदी नहीं हुई है वही टोकन तुम्हर एप एवं समिति सॉफ्टवेयर के माध्यम से दिनांक 30 जनवरी से 31 जनवरी 2025 का धान का टोकन दिनांक 26 जनवरी से 29 जनवरी तक जारी किया गया है। पर शासन के नियम नीति के अनुसार जितने दिनों में धान खरीदी करना है ।वहां तक सॉफ्टवेयर में लोड रहता है ये सिस्टम कहता है लेकिन किसानों की धान खरीदी में इस साल की खरीदी समझ से परे हैं । जिले में धान की समय पर उठाओ नहीं और अब जब हुआ तो धीमी गति होने से कई खरीदी केंद्र में तो पैर रखने की जगह नहीं थी। ऐसे हैं जहां 18 हजार बोरो की क्षमता है पर वहां आज भी 85 हजार धान के बोरे पड़े हैं।

ऐसे में शासन द्वारा उठाओ की लचर व्यवस्था से सभी हलाकान और परेशान है साथ ही गिनती के कुछ दिन बचे हैं ऐसे में क्या धान खरीदी का लक्ष्य पूरा हो पाएगा।या फिर इसके लिए शासन द्वारा नया आदेश जारी कर आगे नया तारीख तय करेगा ।जिसको लेकर संशय की स्थिति है । और कई खरीदी केंद्र के प्रभारी तो अपना सर पकड़ कर बैठे हैं इतने कम समय में इतने बचे हुए धन की खरीदी कैसे होगी नाम न छापने के शर्त पर कुछ प्रभारियों ने बताया कि हमारे सालों के अनुभव में ऐसा पहली बार हुआ है। जिसमें इतनी परेशानी उठानी पड़ रही है इससे पहले इतनी बड़ी समस्या इस साल जैसे कभी नहीं हुआ था। 15 नवंबर से चालू हुई धान खरीदी इस तरह ढाई महीने में भी पूरा नहीं हुआ है वह तो ऊपर वाले का शुक्र है कि इस साल बारिश नहीं हुई नहीं तो खुले में पड़े हजारों कुंटल धान ऐसे ही बर्बाद हो जाते क्योंकि धान रखने की फड़ में जगह नहीं है। तो वही सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने की दावे कर रहे हैं। अब वह दावा इतने कम समय में कैसे पूरा होगा या फिर किसान सड़क पर उतरेंगे अपनी मांग मनवाने के लिए यह तो समय बताएगा साथ ही सर पर त्रिस्तरिए पंचायत चुनाव है। ऐसे में सरकार के नुमाइंदे क्या खरीदी केंद्रों में हो रही परेशानी को सरकार तक पहुंच पाएगी अगर यह व्यवस्था रहा और किसान सड़क पर उतरेगा और आने वाले चुनाव में इसका क्या असर देखने को मिलेगा। यह तो समय बताएगा।

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