खबर हेमंत तिवारी ,
,,,,,,पत्थर की मुरत की तरह मौन वन विभाग ,,,,,,,,,,वृक्षारोपण सिर्फ कागज में दिखावा ही रह गया ,,,,,,,,,,,हजारों करोड़ों रुपए की बजट व्यर्थ साबित हो रहा है,,,,,,,,,,,आखिर आम जनता की गाढ़ी कमाई का हिस्सा की बर्बादी क्यों,,,,,,,,,,
,,छुरा (पाण्डुका) /गरियाबंद जिले के जंगलों की दयनीय। हालत दिन प्रतिदिन गिरते जा रहे हैं। चाहे पेड़ो की कटाई को लेकर हो या अवैध चराई को लेकर हो बता दे कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी राजस्थानी और गुजराती भेड़ बकरी ऊंट घोड़ा लेकर जिले की जंगलों को उजाड़ने लाखों की संख्या में भेड़ बकरी लेकर गरियाबंद जिले के जंगलों में अवैध चराई करने चरवाहे पहुंच गए हैं यहां लगभग 6 माह तक हरे-भरे वृक्षों की पत्ते टहनियों के साथ छोटे-छोटे पौधों को भेड़ बकरिया अपने घूरो से नष्ट कर रहे हैं और इन्हीं वजहों के कारण जंगल धीरे-धीरे विनाश की ओर बढ़ रहे हैं । तो वहीं वन विभाग लिखित शिकायत के बाद भी मूकदर्शक बन पत्थर की मुरत बन मौन साधे हुए हैं कहीं ना कहीं मौन स्वीकृति साफ दिखाई दे रहा है ।की दाल में कुछ काला है।

भेड़ बकरियों की संख्या लगभग लाख से डेढ़ लाखों की संख्या में होते हैं। जो एक बकरी अगर एक पौधे को चर लेता है तो लाखों की संख्या में पहुंचे भेड़ बकरियों के साथ ऊंट और घोड़े एक दिन में कितने पौधों को नुकसान पहुंचाते होंगे अब आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते है 6 माह की चराई के बाद जंगलों की हालत क्या होती होगीसरकार हजारों करोड़ों रुपए बजट बनाकर हरियाली बनाए रखने एवं जल जंगल बचाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं ताकि जंगलों में हरियाली बने रहे और वनों से हमें मिलने वाले उत्पाद इमारती लकड़ी शुद्ध हवा जैसी जरूरत की चीजें आसानी से उपलब्ध हो सके पर यह सब एक समय के साथ समाप्त होते दिखाई दे रहे हैं जंगल हरे-भरे जंगल नर्सरी में तब्दील हो रहे हैं अधिकांश जंगलों को देखा जाए तो चारों तरफ चट्टानें ही चट्टानें दिखाई दे रहे हैं।इन दिनों इनका एक गैंग पाण्डुका परिक्षेत्र के सांकरा बीट में डेरा डाले हुए है।

जिसमे हजारों की संख्या में इनके मवेशी है मीडिया के द्वारा बिटगॉर्ड और एसडीओ को जानकारी दी गई पर कार्यवाही कुछ भी नहीं।जब मीडिया की टीम पहुंची तो वहां इनके डेरा में पहले से पहुंचे वन विभाग बिटगार्ड और डिप्टी रेंजर पांडुका मेहमान नवाजी का मजा ले रहे थे। एसे में अमानत में खयानात और अगर रक्षक ही भक्षक बन जाय तो जंगल बचाने किसको गुहार लगाएंगे। बहर हाल इनके आने से वन विभाग के चौकीदार से लेकर विभाग के बड़े अधिकारी के लिए अवैध चराई किसी बोनस से कम नहीं है।जो ये अपने हाथो से कैसे जाने देंगे ।कल जिस जगह से इन चरवाहे को खदेड़ा था आज उसी जगह बैठाए है। तो यह कहना गलत नहीं होगा की वन विभाग के संरक्षण में यह अवैध चराई सालो से फल फूल रहा है। वही इस बारे में जानकारी लेने डिप्टी रेंजर पांडुका वीरेंद्र ध्रुव का फोन किया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया,,,,,,,, साथ एस डीओडी राजिम हिमांशु डोंगरे से फोन में बात करने पर उन्हें सारी बातें बताई गई जिस पर उन्होंने कार्रवाई करने के लिए हामी भारी पर खबर लिखे जाने तक इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी वन विभाग के जगह में बैठे थे वही पर अपनी तंबू ताने हुए हैं।
