देवरीबंगला – मार्री बंगला में पाण्डेय परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के षष्ठम् दिवस पर कथावाचक गोपिकेश्वरी देवी जी महारास का प्रकरण बताते हुए कहा और पहले भगवान् की योगमाया शक्ति का स्वरूप बताया कि कैसे योगमाया की शक्ति से भगवान् अपने स्वभाव से विपरीत कार्य करते हैं । माया से परे हो कर भी माया के समस्त कार्य करते हैं । इसलिए कभी भी भगवान् के कार्य सुन कर देख कर बुद्धि नहीं लगानी चाहिए न ही उनकी नकल करनी चाहिए ।

फिर महारास क्या होता है कैसे जीव को महारास प्राप्त हो सकता है ये सब विषय बताया गया । कंस वध की कथा बताते हुए आगे रूखमणी की कथा श्रवण करवाई गई और बड़े हर्षोल्लास के साथ श्रीकृष्ण रुक्मिणी व्यहला उत्सव मनाया गया ।सातवें दिन सुदामा चरित्र बताते हुए कहा कि प्रत्येक जीव को सुदामा जैसे भगवान श्री कृष्ण की निष्काम भक्ति करना चाहिए निष्काम भक्ति करने से भगवान स्वयं ही भक्त को प्रेम धन वैभव बिन मांगे ही दे देते है। परीक्षित मोक्ष का कथा बताई और साथ ही फूलों की होली खेलकर कथा का आज विश्राम किया गया।

