रायपुर। पुरानी कार खरीदने से पहले कम से कम 5-10 किमी तक उसका टेस्ट ड्राइव जरूर करें, ताकि आप अच्छे से कार के ब्रेक, क्लच, गियर और एक्सीलेटर वगैरा की जांच ठीस से हो जाए. इसके अलावा यह भी जांच ले कि कहीं कार का कोई एक्सीडेंट तो नहीं हुआ है। कार खरीजने से पहले इसकी जानकारी भी ले लें।
हर किसी का सपना होता है कि उसके पास एक अपनी कार हो, लेकिन कई बार आर्थिक समस्याएं हमारे सामने आ जाती हैं और हम अपनी कार नहीं खरीद पाते. ऐसे में सेकंड हैंड कार एक अच्छा विकल्प बन जाता है। यह ही वजह है कि इन दिनों सेकंड हैंड कार का बाजार तेजी फैल रहा है। सेकंड का बाजार कितनी तेजी से फैल रहा है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि कई कार कंपनियों का अपना सेंकड हैंड डिविजन है। कई नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां सेकंड हैंड कार खरीदने के लिए लोन की सुविधा दे रही हैं।
कार का डाक्यूमेंट चेक करें
सेकंड हैंड कार खरीदते समय सबसे जरूरी है कि आप गाड़ी के सभी डॉक्यूमेंट को अच्छी तरह देख लें. इसके अलावा कार का सर्विस रिकॉर्ड, रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस भी अच्छे तरीके से चेक कर लें. कार विक्रेता से आरसी की ऑरिजीनल कॉपी लें. इसके अलावा गाड़ी के ओरिजिनल बिल की कॉपी लेना न भूलें. इसमें इंजन नंबर, चेसिस नंबर और डिलीवरी की तारीख रहती है.
अपने नाम पर ट्रांसफर करवाएं कार
कार को खरीदते ही उसे अपने नाम पर जल्द ट्रांसफर करा लें। इसके लिए आपको उचित हस्ताक्षर के साथ सभी आवश्यक फॉर्म भरने होंगे और उन्हें अपने क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी कार्यालय में जमा कराना होगा। ऐसे करने पर आपके पास रसीद 15-18 दिनों के भीतर मिल जाएगी और 40वें-45वें दिन में RC कॉपी पर आपका नाम दर्ज हो जाएगा।
अपने नाम पर इंश्योरेंस करवाएं
रजिस्ट्रेशन ट्रांसफर होने के बाद आपके नाम पर ही वैलिड इंश्योरेंस होना चाहिए। क्योंकि अगर RC आपके नाम पर रजिस्टर्ड है और इंश्योरेंस पुराने मालिक के नाम पर है तो आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी कैंसल हो जाएगी।
