ओपीएस एनपीएस से दोनों सरकारों को लाभ हुआ, कर्मचारियों को क्षति हुई-विजय झा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय पेंशन योजना एनपीएस लागू करने से 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवकों को अनेक प्रकार की परेशानियां हुई। वही दोनों सरकारों को आर्थिक लाभ हुआ। पूर्ववती कांग्रेस सरकार ने एक अप्रैल 22 से पुरानी पेंशन योजना आधी अधूरी लागू कर राज्य सरकार के अंशदान कटौती को बचा ली।दूसरी ओर अब वर्तमान भाजपा सरकार को सेवानिवृत होने पर एनएसडीएल कंपनी में जमा राशि का आधा राशि वापस मिलेगा। कुल मिलाकर दोनों पार्टी के सरकारों को लाभ हुआ। कर्मचारियों को हानि हुई। कर्मचारी नेता विजय कुमार झा ने कहा है कि 2004 के बाद नियुक्त शासकीय सेवक जो अब सेवा निवृत हो रहे हैं, उनके बिना सहमति के एनएसडीएल कंपनी में जमा राशि केंद्र और राज्य के विवाद में फंसा हुआ है। यदि किसी कर्मचारी के खाते में एनएसडीएल कंपनी में 10 लाख जमा है, तो उसे सेवानिवृत्ति पर राज्य सरकार के अंशदान 5 लाख को दो पृथक पृथक चालान में मूल राशि व ब्याज की राशि राज्य सरकार के खजाने में चालान से जमा करनी होगी, तब एनएसडीएल कंपनी उसे शेष जमा 5 लाख वापस करेगी। इस बीच 1 अप्रैल 22 से जो पुरानी पेंशन योजना लागू की गई है, उसकी कटौती राशि लगभग 20 माह की राशि अभी कहां है किस स्थिति में है, वह पृथक से खाते में जमा हो रहा है। सेवानिवृत कर्मचारियों को चूंकि 33 वर्ष अर्हतादायी पेंशन योजना है, उसे आयु कम नहीं किया गया है। इसलिए कर्मचारी से राशि वापस लेने के बाद उसे वास्तविक पुरानी पेंशन योजना जिसमें अंतिम वेतन का आधा पेंशन बनता है, उसके बाद उसमें महंगाई भत्ता जुड़ता है, वह प्राप्त न होकर न्यूनतम पेंशन प्राप्त होगा। इस प्रकार सरकारों ने अपना लाभ देखा कर्मचारियों के लाभ की अनदेखी की गई है। श्री झा ने कहा है अब प्रदेश में तीबल इंजन की सरकार है। केंद्र में राज्य में भाजपा शासन तथा राज्यपाल भी भाजपा के है। ऐसी स्थिति में सरकारें अपनी आर्थिक लाभ को देख रहे हैं, कर्मचारियों की क्षति की ओर ध्यान नहीं है। इसलिए श्री झा ने मांग की है कि अब पूर्ववत 1 नवंबर 2004 के पूर्व की पुरानी पेंशन योजना यथावत लागू होनी चाहिए। केंद्रीय वित्त मंत्री व रिजर्व बैंक का यह कथन की कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने से देश की आर्थिक स्थिति खराब होगी। अन्य नागरिकों को प्रासंगिक लाभ देने में रिजर्व बैंक आर्थिक स्थिति खराब होने की बात नहीं कह रही है। जबकि शासकीय सेवक ही देश और प्रदेश के विकास के संवाहक होते हैं।

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