21वीं सदी में आज भी मजबूर है अंधेरों में जिंदगी काटना,दिव्यांग की दर्द बन गई मजबूरी

गरियाबंद. वैसे तो छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा जहां पर बिजली नहीं पहुंच पाती ऐसे सुदूर अंचलों के गांवो, पारा, टोला में भी सौर ऊर्जा होम लाइट के माध्यम से बिजली पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। और उस दिशा में कार्य भी दिखता है। उसके बावजूद भी जमीनी स्तर के कर्मचारियों द्वारा सही ढंग से
देखरेख और सुधार प्रक्रिया में तेजी नहीं लाने के कारण सौर ऊर्जा होम लाइट महीनों से जलना बंद हो गये है। और मोहल्ले वासियों ने अंधेरों में रहकर अपने परिवार के साथ जिंदगी काटने मजबूर हैं। बरसात के पूर्व विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन व आदेश के परिपालन करते हुए जहां के सौर ऊर्जा होम लाइट बिगड़ा हुआ है। उसे मरम्मत किए होते तो गरीब, मजदूर परिवार अपने बाल बच्चों के साथ बरसात के दिनों में भी विषैले सर्प,
बिच्छू, चींटी, जंगली जानवरों से निर्भीक होकर सुकून की जिंदगी जीते। लेकिन अंधेरों में रहने वाले लोग ही जानते हैं कितने परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक गरीब परिवार जिला मुख्यालय के विकासखंड मैनपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत अड़गड़ी के आश्रित ग्राम जरहीडीह निवासी दिव्यांग कातिक राम नेताम ने अपना परेशानी बताएं, कि हमारे पारा के चार घर के सौर ऊर्जा होम लाइट रात्रि में नहीं जलता है। जिसके कारण छोटे-छोटे बच्चों को अंधेरों में हिफाजत करना बड़ी परेशानी होती है।विषैले सर्प, बिच्छू का डर हमेशा बना रहता है। कई बार सौर ऊर्जा विभाग के स्थानीय कर्मचारियों को सौर ऊर्जा होम लाइट के मरम्मत के लिए कहा गया लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सुधार नहीं किए जाने से अंधेरों में रहते हुए हम लोग जिंदगी गुजार रहे हैं। दिव्यांग कातिक राम नेताम ने सौर ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से बिगड़े हुए होम लाइट के मरम्मत कराने की मांग किया है। पर अभी तक संबधित विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नही दिए जा रहे हैं।

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