क्रेशर प्लांट से उड़ने वाले धूल के गुबार से घुट रहा लोगों का दम पर्यावरण विभाग को नही लोगों की सेहत की परवाह


पाटन। विकासखंड पाटन के गोंड़पेड्री, छाटा,धौराभाठा,पतोरा,चुनकट्टा,मुड़पार,ढौर,परसाही, सेलूद में दर्जनों चुना पत्थर खदान एवं क्रेशर है  जहां पर वर्षों से नियमों को ताक पर रखकर क्रशर प्लांट चलाया जा रहा है।सेलूद अंचल में दर्जनों क्रेशर प्लांट हैं। इन क्रेशरों के चलने से धूल का गुबार  गांवों में छा जाता है। दिन में सफाई करने के बाद दोबारा घरों में धूल भर जाती है। अंचल के इन गांवों में लोगों के स्वास्थ्य पर इस धूल के गुबार का असर पड़ रहा है। लोगों में सांस की बीमारी भी बढ़ गई है। इसे लेकर ग्रामीण  पूर्व में कई बार शिकायत तक कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्रेशर  संचालक पानी का छिड़काव तक नहीं करते। इस कारण  गांवों तक धूल छाई रहती है।
क्षेत्र के अधिकांश क्रशर प्लांट की दूरी मुख्य सड़क से सौ मीटर से भी कम एवं सिंचाई नहर से 50 मीटर से भी कम की दूरी पर स्थित है। सड़क के किनारे एवं सिंचाई नहर के पास पत्थर खदान की अनुमति नही मिलती पर यहां कोई नियम काम नहीं कर रहा है। क्षेत्र के क्रशर प्लांट में सिर्फ यही नियम ध्वस्त नहीं है। प्लांट खुले में है, चारदीवारी नहीं है। क्रशर प्लांट के डस्ट से राहगीर परेशान हैं। प्लांट की गर्द से आसपास  के खेत खराब हो रहे हैं। यह सब खुलेआम हो रहा है और पर्यावरण विभाग आंख बंद कर बैठे है। उन्हें आमजन की सेहत की कोई परवाह नही है। खदान संचालकों को संचालन की अनुमति देते समय स्पष्ट रूप से पर्यावरणीय नियम के पालन के शपथ पत्र लिए जाते हैं।
इनकी धूल से श्रमिकों और आसपास के इलाकों में पडऩे वाले प्रभाव को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भी सरकार को सख्त आदेश जारी किए हैं, जिनमें उन्हें धूल का कंट्रोल हर हाल में करना है। इसके बावजूद गोंड़पेन्ड्री,छाटा,चुनकट्टा,पतोरा,मुड़पार,परसाही, सेलूद,ढौर के स्टोन क्रेशरों में नियमों की अनदेखी की जा रही है। अधिकांश क्रेशरों का स्थल निरीक्षण कर लिया जाए तो विंड वाल, जल छिड़काव, प्लांटेशन, तारपोलिंग नहीं मिलेगी।

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