खबर हेमंत तिवारी
पांडुका/ तहसील कार्यालय छुरा के अंतर्गत उप तहसील पांडुका सहित आसपास के ग्राम पंचायतों में इन दिनों सेवा मद की भूमि जो कोटवारो को उनकी सेवा के बदले जीविकोपार्जन के लिए दिया गया था। उन्हें गुपचुप तरीके से अपने नाम में रजिस्ट्री करवा लिया है अब उसे अलग-अलग हिस्सों में बेच रहे हैं वहीं कोटवारों की करोड़ों की जमीन को जमीन दलाल बहला फुसलाकर कौड़ी के दाम में खरीद कर उसे लाखों के दाम मे बेच रहे हैं और गरियाबंद में बैठे रजिस्टार ऑफिस के अधिकारी आंख मूंदकर इनकी इस जमीन को रजिस्ट्री भी कर दे रहे हैं। बता दें कि अंचल, सहित कई ग्राम पंचायतों में ऐसी शासकीय सेवा भूमि को बेचने का मामला सामने आया है जिसमें एक ग्राम पंचायत में पूर्व कोटवार ने तो अपनी सेवा भूमि की रजिस्ट्री भी करवा लिया था पर तहसील कार्यालय छूरा द्वारा उस पर रोक लगा दी गई है फिर यह मामला प्रकाश में आया, पटवारी ने नक्शा खसरा नही दिया है तो रजिस्ट्री कैसे हो गया ।कोटवार पटवारी से लेकर रजिस्टार और तहसील कार्यालय में बैठे जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी बेधड़क इनको खरीदी बिक्री में सहयोग दे रहे हैं l जिस वजह से जमीन दलालों के चुंगल में फंसे सड़क किनारे के करोड़ों की जमीन कौड़ी के दाम में बेचा गया है इसके साथ ही शासकीय मद की भूमि भी अब महफूज नहीं है जरूरत है किसी बड़ी कार्रवाई की क्योंकि पाण्डुका अंचल में इन दिनों अवैध प्लाटिंग का कारोबार खूब फल फूल रहा है। बिना डायवर्सन के जमीन को लगभग 4 से 5 लाख डिसमिल में बेचा जा रहा है और ये जमीन दलाल सरकारी नौकरी वाले कर्मचारियों को व छोटे छोटे दुकानदारों को फसाते है ।और ये दलाल अच्छे से जानते की 1से 2 डिसमिल जमीन का रजिस्ट्री नही होता इसलिए खरीददार ग्राहक खोजकर उसे 4 से 5 लोगो को संयुक्त रूप रजिस्ट्री करवा देते है। उसके बाद खरीददार अपने अपने जमीनों को अलग करने इनके चक्कर काटते रहते है बाद में खरीदार इनके चक्कर में ना तो लोन ले पाते है। ना ही डायवर्सन करा पाते है ।,,,,,,,,,, एसे करते है गुमराह ये दलाल और उनके चमचे पाण्डुका को तहसील और ब्लॉक बनने का झांसा देकर हजारों की जमीन को लाखो और करोड़ो में बेंच रहे है।जबकि जितना जमीन की कीमत पाण्डुका में है उतना तो राजधानी रायपुर, राजिम, छुरा गरियाबंद में नही है। इन्ही कारणों से पाण्डुका में जमीन दलाल बहुत ही सक्रिय है। जो कौड़ी की जमीन को बेचकर लाखो कमा कर मालामाल हो रहे हैं।
