खबर हेमंत तिवारी
छुरा। गरियाबंद जिले के गरीब वर्ग के आदिवासियों के स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए केंद्र व राज्य सरकार जिला अस्पतालों में सर्व सुविधा उपलब्ध कराने कहीं ना कहीं कमजोरी नजर आने लगे बात करे सोनोग्राफी सुविधा से प्रसूति महिलाएं वंचित साथ ही ब्लड जरूरतमंद मरीजों को आसानी से ब्लड ना मिल पाना हाल ही में एक गरीब वर्ग के आदिवासी गरीब महिला राजमत बाई ध्रुव(61) वर्ष जो छुरा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम पंचायत पेंड्रा में आते हैं तबीयत खराब हो जाने पर मरीज को लेकर परिजन जिला अस्पताल गरियाबंद पहुंचे जहां बीमारियों को जानने के लिए तरह-तरह की खून की जांच चेकअप किया गया लेकिन सभी जांच की सुविधा जिला अस्पताल में नहीं मिल पाई बाहर (प्राइवेट )से भी अधिक पैसे देकर कराना पड़ा रिपोर्ट 3 दिनों के अंदर आने के बाद डॉक्टरों द्वारा रिपोर्ट देखकर सीटी स्कैन कराने मरीज के परिजनों को कहा गया लेकिन परिजन के पास पैसे भी नहीं कर्ज कर गरियाबंद से सीटी स्कैन कराने लाइफ केयर राजिम लेकर पहुंचे करीबन 4500 सिटी स्किन खर्चा और आने-जाने गाड़ी किराया 2 हजार फिर वापस जिला अस्पताल पहुंचने पर जिला अस्पताल में पेट में दो गांठ और कैंसर का लक्षण बताया गया जिसे ऑपरेशन से इलाज होने की जानकारी दी वह इलाज भी जिला अस्पताल में नहीं ऐसे में तो भटकते भटकते मरीज अपनी जान गवा देंगे और फिर पैसे ना होने के चलते घर वापस आ गए हैं सही समय पर सही इलाज नहीं मिल पाने के कारण प्राइवेट हॉस्पिटल में जाने को मजबूर होते हैं आखिर सर्व सुविधा युक्त सरकारी अस्पताल में मरीजों को समुचित सुविधा नहीं मिलते यह जानकारी मिलते ही जिले के इंडियन रेड क्रॉस संरक्षक सदस्य समाजसेवी मनोज पटेल पीड़ित महिला से मुलाकात कर मदद करने भरोसा दिलाया और उनकी स्थिति जाने पैसे नहीं होने की जानकारी मिलते ही तत्काल शासन प्रशासन से मदद करने गुहार लगाया।
