खबर- लीना ध्रुव मैनपुर- आज छत्तीसगढ़ के पहले त्यौहार के रूप में मनाई जाने वाले हरेली त्यौहार, जिसमे किसान अपने खेतों वा खेतो की पूजा की जाती हैं। तथा खेतो में नीम पत्ता और भेलवा का पत्ता लगाते है जिसमे धान में होने वाले कई प्रकार की बीमारी और रोगों से बचाया जाए। इसे लगाने से धान में बीमारी नहीं लगती, गांव व्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाने वाले राउत समाज जिनके बिना गांव के व्यवस्था में नेग नियम परंपरा अधूरा है ,आज हरेली के दिन भी गांव के राउत समाज द्वारा हरेली के पहली रात को गांव के खार में लोगो और पशुओं के लिए स्वास्थ वर्धक कंद मूल जडिया इक्कठा कर रात में पकाया जाता है।तत्पश्चात सुबह गांव के बइगा के साथ गांव के सभी देवी देवता में प्रथम पूजन कर बाद में गांव की खेरखड़र जहा पशुओं को इकठ्ठा की जाती है।वहा जा कर बरसात के पूर्व लगने वाले बीमारियों महामारी ऐसे रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ वर्धक जड़ी बूटियां कंद जैसे जड़ी बूटियों को पशुओं को खिलाया जाता है। उसके बाद गांव के लोगो को ये जंगली जड़ी बूटियां खिलाई जाती हैं।उसके बदले राउत समाज को घर से लाए गए चावल दाल वगेरह दिया जाता है। साथ ही साथ गेड़ी चढ़ने का भी परंपरा है बच्चो के लिए गेड़ी बनाई जाती है। हरेली का त्यौहार किसानों के लिए धान समृद्धि लाती है।
छत्तीसगढ़ के पहली त्यौहार हरेली त्यौहार
