वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने पर बिफरे प्रदेश के कर्मचारी:राज्यविकास की बागडोर संभालने वाले समस्त कर्मचारियों का मनोबल गिराने वाला अव्यवहारिक आदेश वापस हो:भर्ती पर रोक भी युवाओं के सपनो पर कुठाराघात जैसा-वीरेंद्र दुबे

रायपुर–कोरोना संक्रमण रोकथाम और राज्य विकास की बागडोर सम्भालने वाले प्रदेश के समस्त कर्मचारियों के लिए राज्य शासन द्वारा उनका जुलाई20 और जनवरी 21 में होने वाले वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश अत्यंत दुखदायी रहा समस्त कर्मचारी संगठनों ने इसे कर्मचारी विरोधी अव्यवहारिक निर्णय करार दिया।इसके पहले भी कर्मचारियों की मंहगाई भत्ता रोकी जा चुकी है,वही राज्यकर्मचारी,केंद्रीय कर्मचारियों के वर्तमान मंहगाई भत्ते से 10%पीछे ही चल रहे थे जिससे उन्हें पहले ही काफी नुकसान उठाना पड़ रहा था।इसके बावजूद समस्त कर्मचारियों ने इस संकटकाल में प्रदेश के राहत फंड में बढ़चढ़कर अपने 2 माह के वेतन से अंशदान दिया था उक्त बातें।शालेय शिक्षाकर्मी संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे ने वार्षिक वेतनवृद्धि को रोकने के आदेश को प्रदेश के कर्मचारियों का मनोबल गिराने वाला आदेश बताते हुए शासन से इसे पुनर्विचार कर वापस लेने का आग्रह किया।पहले ही आर्थिक नुकसान झेल रहे कर्मचारियों के लिए यह आदेश पीड़ादायक है।

संगठन के महासचिव धर्मेश शर्मा और प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि प्रत्येक कर्मचारी इस संकटकाल से उबरने के लिए अपना दायित्व निभा रहा है,दिनरात सेवा कर रहे डॉ, नर्स,पुलिस,शिक्षक,कार्यालयीन कर्मचारी,सफाई कर्मचारी आदि कोरोना रोकथाम में संलग्न समस्त कर्मचारियों के लिए पुरस्कार की जगह, वार्षिक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश, दण्ड के समान प्रतीत हो रहा है। प्रदेश के कर्मचारियों को अब 10%DA, 4%CPS अंशदान,10%वार्षिक वेतनवृद्धि,CM फंड वेटनकटौती आदि से बड़े आर्थिक नुकसान हो रहे हैं और इस आपदाग्रस्त समय मे बढ़ी महंगाई व अन्य चीजों से पहले ही परेशान हैं।कर्मचारियों के इस आर्थिक नुकसान से प्रदेश के व्यापार पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा,जब कर्मचारी के हाथ तंग होंगे तो बाजार भी गुलजार नही रह पाएगा और प्रदेश का आर्थिक चक्र भी अवरुद्ध होगा।

शालेय शिक्षाकर्मी संघ के समस्त प्रांतीय,जिला व ब्लाक पदाधिकारियों ने इसके लिए प्रदेश के समस्त कर्मचारी संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस कर्मचारी विरोधी आदेश के विरुद्ध संगठित होकर इस आदेश के वापसी हेतु सामूहिक प्रयास करें,शासन जल्द इस अव्यवहारिक निर्णय को वापस लें।

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