खनिज संपदा को लूट रहे हैं सत्ता पक्ष के नेता, रात दिन मशीन लगा कर बिना स्वीकृति रेत निकाल कर चीर रहे नदियों का सीना

  • चर्चे हैं पूरे जिले में वर्तमान नेताओ के खदान चलाने का
  • कलेक्ट्रेड मे शिकायत के बाद भी अधिकारियों की मौन स्वीकृति,आखिर किसका हैं संरक्षण

लोकेश्वर सिन्हा@ गरियाबंद. गरियाबंद जिले में राजनीतिक रसूख वाले नेता बेखौफ चला रहे है अवैध रेत खदान, एक दिन में 200 से ज्यादा हाईवा रेत का परिवहन इन्ही खदानों से होता है। दबंगई ऐसे की वैध खदानों को बंद करना पड़ा, लाखो के राजस्व का नुकसान, मुनाफा नेता अफसर के जेब में.. भाजपा बोली कांग्रेस के करप्शन मैनेजमेंट फार्मूला के आगे प्रशासन भी नतमस्तक है।
गरियाबंद जिले में रेत खदान के लिए पैरी नदी में 11घाट को अधिकृत किया गया है, लेकिन इससे ज्यादा प्रशासन की मौन स्वीकृति से अनाधिकृत खदाने चल रही हैं। इनमे से तर्रा, कूकदा (कुटैना) चौबेबांधा, सिंधौरी, पितईबंद, लचकेरा का खदान है, जहा से रोजाना 80 से 100 ट्रिप हाईवा रेत का अवैध परिवहन हो रहा है। माइनिंग व नेशनल ग्रीन ट्यूबरी के सारे नियम को ठेंगा दिखाते हुए पैरी का सीना छलनी किया जा रहा है। सभी खदानों में फोकलेन व चेन माउंटेन मौजूद है, जो दिन रात रेत का दोहन कर रही है।भाजपा के आरटीआई प्रकोष्ठ के नेता प्रीतम सिन्हा ने आरोप लगाया है की कांग्रेस का करप्शन मैनेजमेंट का फार्मूला है। बड़े नेता सरकारी योजनाओं में सीधा दखल है, इसलिए कांग्रेस के कुछ नेताओं को खुश करने रेत खदान को नियम विरूद्ध दोहन करने दिया गया है। अवैध चल रहे सभी खदानों में प्रत्यक्ष रूप से कांग्रेसी नेताओं का हाथ है। मामले में पक्ष जानने जिला खनिज अधिकारी फागुलाल नागेश से बात की गई तो वे पहले कॉल रिसीव नहीं किया, दूसरे माध्यम से संपर्क करने पर उन्होंने तबियत खराब का हवाला देकर इस मामले में बाद में बात करने की बात कही।

मामले को जानने व समझने हमने इसकी ग्राउंड रिपोर्ट किया जिससे कई चौकाने वाले मामले सामने आए
तर्रा में दबंगों का कब्जा सुरसाबांधा पंचायत की शिकायत पर नहीं हुई कार्यवाही

आपको बता दे कि सबसे ज्यादा रेत की निकासी तर्रा के अवैध रेत घाट से हो रही है, यहा जब हम पहुंचे तो, यहा का नजारा भयानक था, दो किमी तक नदी में ही मिट्टी व बेशरम के पौधे को डाल कर निकासी के लिए सडके बनाई गई थी, दूर दूर तक खनन के बड़ी नालिया मौजूद थी, एक चैन माउंटेन दुर्ग जिले भेजने के लिए रेत भर रहा था। तो दुसरा फोकलेन 100 मीटर दूर पर खड़ा था। हाईवा के ड्राइवर ने कहा 10 चक्के भरने के लिए 2500 रुपए दिया गया है। गाड़ी बड़ी होने पर कीमत 4 हजार तक जाता है।


संचालक का नाम पूछने पर मौजूद लोगो ने जिले के एक कांग्रेसी नेता का नाम बताया…
इस खदान से नेशनल हाइवे तक पहुंचने सुरसाबांधा बस्ती के बीचों बीच वाहन गुजरती है।भारी वाहनों से गली दब गई है। उपसरपंच गौतम साहू ने बताया की गांव की सीमा पर चल रहे अवैध रेत घांट गांव की दुर्दशा व भारी वाहन गुजरने से भयभीत होने की शिकायत करने 28 अप्रैल को कलेक्ट्रेट गए।कलेक्टर प्रभात मालिक से इसकी शिकायत भी किए, लेकिन अब तक मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुआ, उल्टे राजनीतिक रसूख वाले कथित ठेकेदार ग्रामीणों को धमका रहे।

राजस्व देने वाली खदान बंद? सेटिंग वाले बेधड़क चल रहा
सरकडा घाट में दो रेत खदान की मंजूरी दी गई थी, लगभग 3 माह तक खदान से लाखो का राजस्व मिला, ग्रामीणों को मजदूरी भी मिल रही थी। लेकिन अब दोनो बंद है। वजह इसके 5 किमी की दूरी में मौजूद तर्रा के अवैध खदान के अलावा, राजिम से कम दूरी पर सुगम जगह पर मौजूद कुकदा (कुटैना) चौबेबांधा, सिंधोरी, पितईबंध जैसे घाटों पर खदान के अवैध संचालन की छूट देना। इन खदानों में मशीन जल्द लोड के देती है। रॉयल्टी व मजदूरी नही देना होता इसलिए वैध खदान की तुलना में 1000 रुपए कम किमत पर मिल जाता है। संचालक दूसरे जिले का है, स्थानीय रसूखदारों के आगे नियम कायदे नही चली ऐसे में सरकड़ा को बंद करना पड़ा।

एक सीन ऐसा दिखा,जो बताता है पुलिस व यातायात भी सेट है
अधिकृत खदान परसदा जोशी से एक हाइवा रेत भर कर निकली, राजिम से पहले कोमा के पास राजिम पुलिस का एक सिपाही ने वाहन को रूकवाया, कूछ बात चीत किया फिर आगे बढ़ गया। रोके गए वाहन चालक से हमने बात किया तो उसने रेत के रॉयल्टी पेपर नही दिखाया, पूछने पर वाहन मालिक से बात कराया, जिसने बताया की नए रायपुर के यातायात प्रभारी के लिए यह रेत जा रही है। अब सवाल उठता है की वाहन रोकने वाला जवान कार्यवाही क्यों नही किया, इसके पीछे दूसरी हाईवा के पास सुबह 11 बजे की रॉयल्टी पर्ची था, पर वह मार्ग से साढ़े 4 बजे गुजर रहा था।आशंका है की लीगल खदान में भी एक पर्ची काट कर दिन भर बगैर रॉयल्टी काटे रेत परिवहन करवा रहे होंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *