स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयास से पाटन में समुदाय आधारित पोषण प्रबंधन कार्यक्रम

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत कलेक्टर दुर्ग के निर्देशन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में विकासखंड पाटन के बीएमओ डा आशीष शर्मा एव महिला बाल विकास विभाग के सीडीपीओ सुमित गण्डेचा के नेतृत्व में समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिसमे चिकित्सा अधिकारियों एवं ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजको का प्रशिक्षण पूर्ण किया जा चुका है। आगामी दिवसों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों का प्रशिक्षण पूर्ण किया जायेगा।श्री सुमित गण्डेचा ने बताया कि विकासखंड में वर्तमान में समुदाय आधारित कुपोषण देखभाल आरंभ किया जा चुका है। जिसमें बच्चो का पंजीयन कर उनके पोषण सुधार एवं चिकित्सकीय देखभाल चल रही है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों की शीघ्र पहचान क्यों की जानी चाहिए ?इसके बारे में डा आशीष शर्मा बीएमओ पाटन में बताया कि 5 वर्ष तक के कम उम्र के बच्चे जिनका ऊंचाई के अनुसार वजन -3SD से नीचे होता है उनमें बाकी बच्चो की तुलना में मृत्यु का खतरा ज्यादा रहता है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों में अन्य बीमारियों के इंफेक्शन और मृत्यु दर को कम करने के लिए जल्दी पहचान कर त्वरित ईलाज करने की आवश्यकता होती है। यद्यपि कुपोषण के सभी रूपों में मृत्यु दर का खतरा ज्यादा होता है किंतु यह अति गंभीर कुपोषित श्रेणी के बच्चों के लिए सबसे अधिक होता है। कुपोषण के कारण शारीरिक विकास में रुकावट,मानसिक विकास में कमी,रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने के कारण संक्रमण का खतरा एवं अन्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं। कुपोषण की समय से पहचान और त्वरित ईलाज से समुदाय आधारित पोषण सुधार एवं पोषण पुनर्वास केंद्रों में भर्ती कर उपचार की आवश्यकता होती है।जिन कुपोषित बच्चों को भूख अच्छी होती है उनका ईलाज समुदाय आधारित कार्यक्रम(CMAM) में किया जा सकता है। एवं खराब भूख या चिकित्सा जटिलता वाले अति गंभीर कुपोषित बच्चों को अस्पताल आधारित उपचार (एनआरसी) की आवश्यकता होती है।

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