रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संबंध में तमाम दावे कर भले ही अपना पीठ थपथपाएं किंतु जमीनी स्तर पर छत्तीसगढ़ राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णता ठप है तथा पीड़ित जनता भगवान भरोसे है। प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर आम आमदी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सूरज उपाध्याय एवं जिला सचिव विजय कुमार झा ने पत्रकार वार्ता में छत्तीसगढ़ सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो गईं हैं। इसका ज्वलंत उदाहरण बालोद के ग्राम भैंसबोड़ में एक शटर लगे घर में सरकारी उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हो रहा है। डौंडी ब्लॉक के भर्रीटोला में अस्पताल एक स्कूल में संचालित हो रहा है। सिंघोला सामुदायिक भवन 5 सालों से सिंघोला के सरपंच जितेंद्र कुमार नेताम घर में चल रहा था, क्योंकि सरकारी भवन नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रदेश के अस्पताल खुद वेंटिलेटर पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत इतनी खराब है कि किसी की तबियत खराब हो जाए तो, उसे मीलों दूर जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव की सुविधा नहीं मिल रही है। आलम यह है कि लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं। राजधानी रायपुर की बात करें तो प्रदेश के सबसे बड़े शासकीय अंबेडकर अस्पताल की हालत बेहद गंभीर है। 1300 बिस्तर का अस्पताल है और रोजाना 2 हजार से ज्यादा ओपीडी, लेकिन सिटी स्कैन और एमआरआई की सिर्फ एक मशीन है, जबकि रोजाना 300 से ज्यादा मरीजों को डॉक्टर एमआरआई व सोनोग्राफी जांच के लिए लिख रहे हैं, ऐसे में दिन भर में महज 20 से 25 मरीजों की जांच हो पाती है। अस्पताल के अधिकारी खुद स्वीकार कर रहे हैं कि स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहतर नहीं है। छत्तीसगढ़ फर्जी डॉक्टरों और फार्मासिस्टों का पनाहगाह बन गया है। अन्य राज्यों के फर्जी डॉक्टर छत्तीसगढ़ सरकार की कमजोर व्यवस्था की वजह से फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पंजीयन करा ले रहे हैं। उड़ीसा, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र के फर्जी लोग सरकार की फेल व्यवस्था की वजह से छत्तीसगढ़ आ रहे हैं। जो बिना रोकटोक के अस्पताल खोलकर प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रदेश में 5 हजार से अधिक फर्जी पंजीयन हुआ है और लापरवाही का आलम देखिए कि फर्जीवाड़े के जांच की फाइल ही गायब हो गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कितने फर्जी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, इसके बारे में सरकार के पास कोई जानकारी नहीं है। न ही उन पर कोई जांच और कार्रवाई होती है। बस्तर संभाग की बात करें तो यहां पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी खराब है। बस्तर में विकास के दावे सरकार करती है। लेकिन हाल ही में ऐसी तस्वीर सामने आई, जिससे सरकार के दावों की पोल खुल गई। बस्तर जिले के बारसूर में सड़क न होने के कारण गर्भवती महिला को खाट पर लादकर अस्पताल कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। इस बीच समय से इलाज न मिल पाने के कारण कई बार जच्चा-बच्चा दोनों की जान चली जाती है। वहां के सरपंच ने खुद बताया कि विधायक और सांसद ध्यान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि आए दिन इस तरह की घटनाएं होती हैं। कांकेर जिले के पखांजुर इलाके में आज मरीज की जान बचाने के लिए गांव के ग्रामीण चारपाई पर अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन सरकार और उनके नेता मंत्रियों को प्रदेश की जनता की जनता और उनके स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। श्री झा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि नक्सल घटनाओं में चाहे पुलिस जवान शहीद हो चाहे नक्सली आदिवासी मारे जाएं। मानवीय संवेदना, मानवाधिकार शर्मसार हो रही है। 2 देशों के युद्ध में घायल चोटिल दोनों देशों के सेना, जवान के लोगों को रेडक्रॉस के मानव सेवी तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराते हैं तथा इसका विरोध दोनों युद्धरतू देश भी नहीं करते हैं। लेकिन दुर्भाग्य है कि 20 सालों में बड़ी नक्सली घटनाओं में तत्काल 108 संजीवनी नहीं पहुंच पाई । इसके कारण घंटों कांग्रेस के नेता ही पड़े रहे व काल के आगोश में समा गए। इस पर सरकार को गंभीर चिंतन करनी चाहिए।
प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था ठप्प, पीड़ित जनता भगवान भरोसे, स्वास्थ्य व्यवस्था स्वयं वेंटिलेशन पर-आप
