पाटन– वैशाख कृष्ण पक्ष अमावस्या कृतिका नक्षत्र शोभन योग में (22 मई ) महिलाओं ने अपने पति के लम्बी उम्र के लिये बड़ (बरगद)वृक्ष की पूजा किया जैसा कि इस व्रत के नाम और कथा से ही ज्ञात होता है कि यह पर्व हर परिस्थिति में अपने जीवनसाथी का साथ देने का संदेश देता है। इससे ज्ञात होता है कि पतिव्रता स्त्री में इतनी ताकत होती है कि वह यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस ला सकती है। वहीं सास-ससुर की सेवा और पत्नी धर्म की सीख भी इस पर्व से मिलती है। मान्यता है कि इस दिन सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और उन्नति और संतान प्राप्ति के लिये यह व्रत रखती हैं।वट सावित्रि व्रत में वट यानि बरगद के वृक्ष के साथ-साथ सत्यवान-सावित्रि और यमराज की पूजा की जाती है। माना जाता है कि वटवृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देव वास करते हैं। अतः वट वृक्ष के सामने बैठकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है
पूजा में कोरोना से बचने का भी रखा ध्यान-/ आज की समय एव परिस्थिति को देखते हुए कोरोना वायरस से बच कर ही पूजा करने का भी सन्देश भी दिया महिलाओं ने इस दौरान शोसल डिटेन्स का भी ध्यान रखते हुए मास्क का भी प्रयोग किया
