दोनों आंखों से दिव्यांग मोतीराम गोंड़, अंधेरें में रहने मजबूर**बूढ़ी मां और अपना 350 रुपये पेंशन में चला रहे हैं जीवन*

*छुरा@@@@@दिव्यांगों व गरीब वृद्धजनों के कल्याण के लिए सरकार अनेक योजनाएं चला रहे हैं।पर धरातल में इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।इसकी वजह है जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों उदासीनता कारण इन योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को समय पर नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से पात्र हितग्राही शासन की अनेकों योजनाओं का लाभ लेने के लिए दर दर की ठोकर खाने को मजबूर हैं।ऐसा ही मामला गरियाबंद जिले के ब्लॉक मुख्यालय छुरा ग्राम पंचायत बिरनीबाहरा के आश्रित ग्राम कुड़ेमा में एक गरीब आदिवासी परिवार की है।कुडेमा निवासी45वर्षीय मोतीराम गोड़ जिनकी दोनों आंखों की रोशनी बचपन से नहीं है।यह विशेष कमजोर अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं जो गरीबी रेखा के नीचे की श्रेणी में आते हैं।घर में पानी तक का साधन नहीं है।दोनों आंखों से दिव्यांग होने के बाद भी बाहर से पानी लाते हैं।पीने की पानी न ही बिजली की कोई सुविधा उनके घर तक पहुंच पाए हैं।राज्य सरकार के द्वारा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को 2500 बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है।विडंबना यह है गरीब पीड़ित दिव्यांगों के जीवन सुधार के लिए ऐसे परिवारों को भत्ता क्यों नहीं दिया जाता? वहीं इस परिवार की जानकारी होने परगरियाबंद जिले के इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी संरक्षक सदस्य समाजसेवी मनोज पटेल ने दादी कुंवासी बाई और उनके दिव्यांग बेटे से हाल जानने की कोशिश की।पर कुंवासी बाई तो अपना तकलीफ बताने की भी स्थिति में नहीं है। यहां के नंदकुमार ध्रुव, भूतपूर्व पंच महेश यादव ने बताया इस 75 वर्ष की उम्र में भी वृद्ध आदिवासी महिला को पेंशन नहीं मिल पा रहा है। इस पर समाजसेवी मनोज पटेल ने नाराजगी जाहिर करते हुए शासन प्रशासन से पीड़ित परिवार को शीघ्र आर्थिक मदद करने की मांग किए है।

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