- पानी की तरह करोड़ों रुपया बहाया पर पानी एनिकट में ठहर नही रहा,ना ही किसानों को लाभ मिल रहा है
खबर हेमंत तिवारी
छुरा /जल संसाधन विभाग के छुरा में स्थित सब डिवीजन के कार्यालय में पानी से भरा लबालब एनिकट का पोस्टर आपको आसानी से दिवालो में टंगे दिख जायेगा ।जिसको देख यह सोच जहन में बैठेगा की यहा बने एनीकेट का लाभ सिंचाई के लिए किसानों को और पानी के भराव से सभी स्थानीय लोग लाभान्वित होते होंगे । पर जब आप धरातल में जाकर देखेंगे तो ठीक इसके विपरित है धरातल में ऐसा कुछ भी नही मिलेगा । बरसात के समय लिया हुवा यह पोस्टर केवल कार्यालय का शोभा बढ़ा रहा है । और ये एनिकट महज कुछ सालो में टूटने लगा है । देखने वालो को
ये पोस्टर भ्रमित कर रहा है । निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपया पानी की तरह विभाग ने बहाया और एनीकेट में ना तो पानी ठहर रहा ना ही दो साल टिका अभी से टूटने लगा है । ऐसा नजारा आपको छुरा विकाखंड के ग्राम पंचायत मेड़कीडबरी से लगे झरझरा नाले में देखने को मिलेगा । करोड़ों की लागत से एनीकट का निर्माण किया गया था। जिससे किसानों को सिंचाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन अभी गर्मी के दिनों में वहां थोड़ा भी पानी का भराव नहीं है और दो साल बाद ही कई जगह उखड़ने लगी है दरारें पड़ रही है। बावजूद करोड़ों खर्च कर नहर नाली का निर्माण कराया जा रहा है। नहर की खुदाई तो बड़े आकार में किया जा रहा है लेकिन एनीकट का गेट की साईज देखें तो चुहे के बिल जैसा छेद दिखाई पड़ता है और उसमें सिंचाई के लिए कितना पानी जायेगा ये सोचनीय है।
प्रशासन के करोड़ों खर्च का क्या औचित्य है और क्या उपयोग होना चाहिये ये इंजीनियर तय करता है लेकिन इसका निर्माण व संचालन में इंजीनियर इसे बनाने में क्या तकनीक के हिसाब से बनाया गया है ये एक गंभीर और सोचनीय विषय है। और इसका सिंचाई का लाभ कितने गांवों के किसानों को मिलेगा यह स्थिति को देखते हुए कुछ कह पाना मुश्किल प्रतीत होता है। एक प्रकार से कहें तो प्रशासनिक पैसे का दुरुपयोग से कम नहीं लगता।

जिले के जिम्मेदार आला अधिकारियों को ऐसे कार्यों के मानिटरिंग में विशेष ध्यान रखना चाहिए, जो किसानों के हितों व सुविधाओं से जुड़ा हो। पर हमेशा कार्यालय से गायब रहने वाले जिम्मेदार यह अधिकारी हमेशा मीडिया के सवालों से बचने के चक्कर में मीटिंग और फील्ड में होने की बात करता है ।अब तो इसका असर कार्यालय अन्य कर्मचारियों को भी पड़ गया है जो इन्ही अधिकारी की भाषा बोलते है ।और कुछ भी बताने से इंकार करते है।

