रोशन सिंह@ उतई।ग्राम कातरो के ठाकुर देव मंदिर में चैत नवरात्री में 89 मनोकामना ज्योति कलश की स्थापित किया गया है।
दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम कातरो का ठाकुर देव मंदिर जो कातरो से चिरपोटी सड़क पर स्थित है। जिसे गाव वाले ठाकुर दिया के नाम से भी जानते है यह इस क्षेत्र का एक ऐसा मंदिर है जो गुम हुए वस्तुओं के मिलने के लिये प्रसिद्ध है विशेषकर किसानों के जानवरों के गुम होने पर यहाँ एक नारियल चढ़ा देने मात्र से उनके गुम हुए जानवरो की मिलने की सम्भवना पुख्ता हो जाता है।
महाशिवरात्रि के समय में यहाँ विशेष मेला लगता है।जहाँ श्रद्धालुओ की भीड़ देखा जा सकता है।तथा नवरात्रि के दोनों पर्व में जोत जावरा का आयोजन किया जाता है।
ग्राम के पूर्व सरपंच पदुम गजपाल बताते है कि ठाकुर देव जी हमारे ही खार में विराजे है जिसे भुरसुदा खार कहते है।यहाँ पर किसानों को खेत के जोताई के दौरान पुराना मिट्टी के बर्तन,राख आदि मिलते है।जिससे पता चलता है कि यहाँ पुराना गाव रहा होगा।ग्रामीण परम्परा के अनुसार गावो में विभिन्न देवताओं का स्थापना किया जाता था जिसमे देवताओं का प्रमुख ठाकुर देव को ही माना जाता था आज भी ग्रामो में ठाकुर देव पूजे जाते है।इसके अलावा कई पुराने पत्थर मिले है, गावो में अक्सर बड़े पत्थरो को देवो के प्रतीक के रूप में स्थापित किये जाते है सम्भवतः ये वही पत्थर है।उन्होंने आगे बताया कि हमारे पिता जी के समय में यहाँ तांत्रिक विद्यावाले यहाँ आकर पूजा किया करते थे,इन्ही को देखकर गाव वालो की रूचि इस भुरसुदा खार की ओर बढ़ा।फिर यह गुम हुए वस्तुओं के मिलने के लिये प्रसिद्ध हुआ।पहले यहा कोई सुविधा नही था।मेरे सहयोगी भोला साहू अन्य सहयोगियों के माध्यम से हमलोगों ने इसे संवारने की कोशिस किया।
अब यहाँ हमलोगों की मांगों के अनुरूप पूर्व व वर्तमान जनप्रतिनिधियों ने बिजली सड़क व भवन की व्यवस्था किया है। फिर भी अभी पर्वो में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सेड व कला मंच की आश्यकता है।मंदिर की विशेष देखरेख पूर्व सरपंच पदुमचंद गजपाल भोला साहू राकेश साहू ढालेश्वर साहू त्रिलोचन साहू रामजी साहू सहित अन्य लोग जुड़े हुए है।
