नवरात्र के नौ दिन श्रद्धापूर्वक रामकथा का श्रवण पुण्य दायी-प्राची देवी

  • रामकथा महोत्सव में बढ़ रही है श्रोताओं की भीड़,शनिवार रामजन्मोत्सव पर रहेगा खास आकर्षण

मनीष चंद्राकर@जामगांव-आर.दक्षिण पाटन के गायत्री शक्तिपीठ आमालोरी में चल रहे नौ दिवसीय श्रीरामकथा महोत्सव में राष्ट्रीय कथावाचिका संत प्राची देवी के श्रीमुख से रामकथा सुनने श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा,शुक्रवार को व्यासपीठ से प्राची देवी ने बताया कि नवरात्र के नौ दिन श्रद्धापूर्वक रामकथा का पठन,श्रवण,चिंतन और मनन करने का बड़ा पुण्य है,जहां भगवान श्रीराम की कृपा होती है,उसी जगह रामकथा संभव हो पाती है और रामजी की कृपा वहीं होती है,जहां उनके भक्त रहते हैं तीसरे दिवस उन्होंने बताया कि शिव पार्वती संवाद से रामकथा की भावभूमि तैयार हुई,इस दौरान उन्होंने नारद मोह प्रसंग रोचक वर्णन करते हुए बताया कि नारद मुनि भगवान को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करते हैं,इससे इंद्र देव का सिंहासन डोल जाता है वह रंभा और कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजते हैं नारद मुनि को घमंड हो जाता है कि कामदेव भी उनके आगे झुक गए।

यह वर्णन सुनाने के लिए नारद भगवान शिव, ब्रहृा और विष्णु के पास जाते हैं इस दौरान भगवान विष्णु समझ जाते हैं कि नारद को अभिमान हो गया है। इसे दूर करने के लिए वह राजा क्षीरनिधि अपनी बेटी विश्व मोहिनी का स्वयंवर रचाने के लिए नारद मुनि को बुलाते हैं उनसे पूछते हैं कि विश्वमोहिनी को कैसा वर मिलेगा। इस दौरान नारद मुनि उन पर मोहित हो जाते हैं इसके बाद वह भगवान विष्णु के पास जाकर हरि रूप मांगते हैं भगवान विष्णु नारद मुनि को हरि यानी वानर रूप दे देते हैं इसके बाद स्वयंवर में उनका उपहास हो जाता है इससे क्रोधित होकर नारद भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं कि जिस तरह आज उनका वानर रूप में उपहास उड़ाया गया है एक दिन इसी रूप से भगवान विष्णु को मदद मांगनी होगी वह स्त्री वियोग में वन में भटकेंगे,उस समय एक वानर ही उनकी मदद करेगा,कथा प्रवक्ता प्राची देवी ने बताया कि शनिवार को भगवान राम जन्म की कथा होगी और रघुनाथ जन्मोत्सव मनाया जाएगा ! कार्यक्रम का संचालन टीवी एंकर शेखर शर्मा ने किया,कथास्थल में शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी नीलमणि भारद्वाज,पूर्व विधायक डॉ दयाराम साहू,अशोक सिंह,अरुण चंद्राकर,जगन्नाथ देवांगन,सियाराम चंद्राकर,मंजू संजय वर्मा,पुष्पा महेंद्र बंछोर,बीआर साहू,जागेश्वर शुक्ला,मनीष चंद्राकर,के आर बंसोड़,यादमल गोलछा,हलधर महमल्ला,युवराज चंद्राकर,गयाराम साहू,अणि चंद्राकर,मनोज बंछोर,रामसिंह बंसोड़,अरविंद चंद्राकर,रेवा राम साहू,घनश्याम पटेल,टोपेन्द्र वर्मा
सहित बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित थे !

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