महिला एवं बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षको की वेतन विसंगति से नाराजगी,,

छत्तीसगढ राज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग में पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति एक प्रमुख समस्या है जिसे दूर कर सम्मानजनक वेतन व समाजार्थिक न्याय पाने के लिए पर्यवेक्षकें विगत 30 वर्षों से संघर्षरत है किन्तु शासन इस विषय में महिला पर्यवेक्षकों के प्रति उदासीन बनी हुई हैं। पर्यवेक्षक संघ की प्रांतीय अध्यक्ष श्रीमती रितु परिहार एवं प्रवक्ता विजय कुमार झा ने बताया है किछत्तीसगढ़ राज्य में महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत पर्यवेक्षकों को कार्यानुसार वेतन नहीं दिया जाना बहुत ही अन्यायपूर्ण हैं। पर्यवेक्षकों के वेतन निर्धारण में विसंगति हैं इस बात को तो शासन ने भी स्वीकार किया है। पर्यवेक्षक सभी क्षेत्रों में महिला एवं बाल विकास के साथ-साथ अन्य विभागों की सफलता में भी अहम भूमिका निभाती है। महिला सशक्तिकरण महिला बाल विकास विभाग का मूल कार्य है किन्तु अपने ही विभाग में महिला पर्यवेक्षक शोषण तथा सभी महिला पर्यवेक्षक आर्थिक, मानसिक और सामाजिक रूप से सम्मानजनक स्थिति से वंचित है।पर्यवेक्षकों को 5200-20200 ग्रेड पे 2400 प्राप्त होता है जो कि समकक्ष शैक्षणिक योग्यता के अधिकारियों से बहुत कम है। कार्यपालिक श्रेणी के कर्मचारी होने के बाद भी इनका वेतन निर्धारण अन्यायपूर्ण और गलत तरीके से किया गया है जो आज भी इस पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं की स्थिति को प्रदर्शित करता है ।छ.ग. राज्य में पर्यवेक्षकों के पदोन्नति के अवसर भी लगभग 8% है अतः 94% पर्यवेक्षक इस पद से ही सेवानिवृत्त हो जाती है भारत शासन के निर्देश में उल्लेख है कि पर्यवेक्षकों को अन्य ब्लॉक अधिकारी के समकक्ष माना जाएगा भारत शासन के निर्देश में उल्लेखित होने के बाद भी वेतन निर्धारण में समकक्षता प्रदान करने में महिला पर्यवेक्षक, महिला एवं बाल विकास को वंचित किया गया।अन्य राज्यों के तुलना में भी छ. ग. महिला पर्यवेक्षकों का वेतन अत्यन्त कम है जबकि कार्यदायित्व समान है। प्रारंभ में एकीकृत बाल विकास परियोजनाएं आदिम जाति कल्याण विभाग एवं पंचायतसमाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित थी इन परियोजनाओं में पर्यवेक्षक के पद पर उच्चश्रेणी शिक्षक तथा पंचायत निरीक्षक के समकक्ष कर्मचारी को पदस्थ किया गया था। 1975 में महिला एवं बाल विकास विभाग के गठन पश्चात विभाग में इन दायित्वों के लिए पर्यवेक्षक पद का सृजन किया गया,परन्तु इस पद का वेतनमान पंचायत इंस्पेक्टर के वेतन से कम निर्धारित किया गया। ज्यादातर समकक्ष पदों का कार्यदायित्व निरीक्षण तक सीमित है किन्तु महिला बाल विकास के पर्यवेक्षकों के कार्यदायित्व में निरीक्षण, पर्यवेक्षण, प्रशिक्षण आदि कार्यों के साथ-साथ सभी विभागीय योजनाओं की ऑनलाईन एंट्री, मोबाइल एप्प जैसे तकनीकी और गैर-तकनीकी कार्य भी शामिल है। इसके अतिरिक्त परियोजना के शाखावार कार्यों का उत्तरदायित्व भी पर्यवेक्षकों को सौंप दिया जाता है। इनके कार्य दायित्व में तो वृद्धि की गई किंतु वेतन में पांचवे पे कमीशन के बाद कोई वृद्धि नहीं हुई । बच्चों के कुपोषण मुक्ति,एनीमिया मुक्त छत्तीसगढ़ शिक्षा ,स्वास्थ्य और बाल संरक्षण ,महिलाओं को उनके अधिकारों के लिए जागृत करती महिलाएं स्वयं अपने लिए कुछ नहीं कर पा रही है ।शासन का इकलौता विभाग जहां केवल महिलाएं कार्यपालिक पद पर है उनकी ऐसी अवहेलना समझ से परे है।कदम कदम पर महिला पर्यवेक्षकों के साथ हो रहे अन्याय का अंत कब होगा ये सवाल अंतहीन है। इस संबंध में माननीय मुख्यमंत्री / सभी विभागों के मंत्री तथा सभी विधायकों को ज्ञापन पत्र व आवेदन के माध्यम से बार-बार अपनी पीडा से अवगत कराया गया। पिंगवा कमेटी तथा वेतन विसंगति समिति के समक्ष भी बार-बार अपनी समस्या रखी गई। विभाग में पर्यवेक्षकों द्वारा अथक प्रयास से नस्ती तो चली किन्तु निर्णय आज भी शून्य है। सभी के द्वारा दिये गये आश्वासन केवल खोखले ही सिद्ध हो रहे हैं। पर्यवेक्षकों की 30 साल सेवा अवधि के बाद भी ना पदोन्नति ना सम्मानजनक वेतन मिला मिला तो सिर्फ आश्वासन और शोषण ।महिला पर्यवेक्षकों की स्थिति में सुधार की दिशा में छत्तीसगढ़ महिला बाल विकास विभाग पर्यवेक्षक कल्याण संघ की प्रांताध्यक्ष श्रीमती ऋतु परिहार प्रांतीय सचिव श्रीमती जयश्री साहू के साथ समस्त संभागस्तरीय / जिलास्तरीय पदाधिकारियों, समस्त कार्यकारिण सदस्यों और संघ से जुडे प्रत्येक सदस्य ने एक जुट हो कर अपनी मांगों के लिए दिनांक सोमवार को बुढ़ा तालाब रायपुर (छ.ग.) में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल / धरना प्रदर्शन के माध्यम से शासन तक अपनी आवाज पहुचाने की कोशिश की है।पर्यवेक्षक संघ ने शासन से 4200ग्रेड पे प्रदान करने की गुहार लगाई है और अब संघर्ष का बिगुल बजाने की ठानी है। संघर्ष की शुरुवात एक दिवसीय हडताल से की है शासन अगर इसी उदासीन रवैये पर अडी रहेगी तो फिर 04 दिवसीय निर्णय ना होने की स्थिति में अनिश्चित कालीन अंतः: भूख हड़ताल किंतु संघर्ष मांग पूरी होने तक रूकेगा नहीं।

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