*छुरा……… छत्तीसगढ़ योग आयोग, छत्तीसगढ़ योग शिक्षक महासंघ, पतंजलि योग समिति तथा भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के संयुक्त तत्वाधान में पोस्ट मैट्रिक बालक आश्रम छुरा में नि:शुल्क योग एवं तनाव प्रबंधन शिविर आयोजित की गई। छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार, छत्तीसगढ़ योग आयोग अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा के मंशानुरूप प्रत्येक विद्यालयीन तथा आश्रम में अध्ययनरत बच्चों को योग शिक्षा प्रदान किया जाना है। पहली कक्षा से बारहवीं तक के पाठ्यक्रम में योग शिक्षा अनिवार्य शिक्षा का अंग है। एससीईआरटी से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स शंकर लाल यदु, संतराम कंवर और अर्जुन धनंजय सिन्हा द्वारा लगातार गांव-गांव तथा आश्रम शालाओं में जाकर विद्यालयीन बच्चों से लेकर सभी वर्गों को योग की धारा से जोड़ने का निरंतर प्रयास विगत 8 वर्षों से किया जा रहा है। अभी तक इन योगाचार्यों द्वारा तीन सौ से अधिक पांच दिवसीय नि:शुल्क योग, आध्यात्मिक चिंतन एवं जन जागरूकता शिविर आयोजित की जा चुकी है। योगाचार्य शंकर लाल यदु द्वारा यौगिक जॉगिंग के बारह अभ्यास, 5 स्थूल व्यायाम को उनके लाभ, सावधानियों से अवगत कराते हुए सिखाया गया। योगाचार्य संतराम कंवर ने मंत्रोच्चारण द्वारा उद्गीथ, प्रणव प्राणायाम, आगामी परीक्षा को दृष्टिगत रखते हुए बच्चों को तनाव न लेने एवं तनाव प्रबंधन हेतु मेडिटेशन कराया गया। नियमित अभ्यास हेतु महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। सुक्ष्म व्यायाम के द्वारा वात रोगों से निदान के उपाय बताया गया। योगाचार्य अर्जुन धनंजय सिन्हा ने 48 सुक्ष्म व्यायामो को 8-32-16 की गिनती की गिनती में अभ्यास कराया। रोगानुसार योग भी कराया गया। सिन्हा ने पेट के बल किए जाने वाले मकरासन, भुजंगासन, नौकासन, शलभासन, धनुरासन का अभ्यास कराया। मंत्रों के साथ सूर्य नमस्कार भी कराया गया। पीठ के बल किए जाने वाले उत्तानपादासन, सेतुबंध आसन, हलासन, सर्वांगासन, विपरीत करनी आसन, विपरीत नौकासन, पवनमुक्तासन, मर्कटासन, पाद वृत्तासन का श्वास प्रश्वास के साथ बारीकी से अभ्यास कराते हुए उनके लाभ से अवगत कराया। सिन्हा ने योगा ओलंपियाड में प्रदर्शन किए जाने वाले कठिन आसन बकासन, कुक्कुटासन, एक पाद ग्रीवासन, द्वि पाद ग्रीवासन, एक पाद राज कपोत आसन, वृश्चिक आसन, नटराज आसन, गरुड़ासन, मयूरासन, पद्म मयूरासन, ओंकारासन, शिर्सासन, पश्चिमोत्तानासन, अकर्ण धनुरासन, भूनमनासन को पूर्ण दक्षता से स्थायित्व के साथ कराने का अभ्यास कराया। सिन्हा ने कहा कि चंचल मन ही बंधन एवं मोक्ष का कारण है, जिसे नियंत्रित करना ही योग है। योग को जीवन का नियमित अंग बनाने से चिरस्थाई निरोगी काया प्राप्त किया जा सकता है। सात्विक आहारचर्या को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया। वात-पित्त-कफ के संतुलन में योग एवं आहार के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। आश्रम अधीक्षक जी.एल. कुंभकार ने आनंद के साथ योग रूपी वैज्ञानिक विद्या का ज्ञान प्रदान करने के लिए सभी योगाचार्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया। तनाव प्रबंधन हेतु कराए गए मैडिटेशन एवं महत्वपूर्ण टिप्स की खुलकर प्रशंसा करते हुए कहा कि वाकई में योग के साथ ध्यान करने से मन स्थिर एवं कुशाग्र होता है। एक अभूतपूर्व मानसिक शांति की प्राप्ति हुई है। प्रशिक्षार्थी कैलाश मरकाम, मोहन लाल नेताम, परमेश्वर ठाकुर, उमेश साहु, पानसिंग सोरी ने बहुत ही कठिन आसनों का अभ्यास किया। इस शिविर में एशकुमार, राजेन्द्र कुमार, गौतम ठाकुर, महेंद्र, संतराम, दिनेश कुमार, देवानंद सहित बड़ी संख्या में युवा वर्ग ने योगाभ्यास का लाभ लिया।

