मैं और मेरे पन का त्याग ही श्रीमद्भगवत गीता का सार है_____ ब्रह्मकुमारी कुंती दीदी श्रीमद् भगवत गीता के अंतिम दिन बारात में ग्रामवासियों का हुजूम उमड़ पड़े

__छुरा :- ब्रह्माकुमारी श्यामनगर द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत गीताज्ञान यज्ञ प्रवचन के अंतिम दिन ब्रह्मकुमारी कुंती दीदी ने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता का सार यही है कि जो कुछ हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, और जो होने वाला है वह भी अच्छा ही होगा। वेदो ग्रंथो में भी, मैं और मेरापन के भावना को त्यागने की बात कही गई है।उन्होंने कहा कि मन के नकारात्मक विचार रावण का प्रतिबिम्ब है और सकारात्मक विचार राम अथवा दैवी संस्कार का प्रतीक है। दोनों प्रकार के संस्कारों को शक्ति, मन के विचारों से प्राप्त होता है, और हमारे मन पर हमारी दिनचर्या का, भोजन का, बाहरी वातावरण जहां हम क्या देखते, सुनते, और पढते है किसका संग करते है, इसका प्रभाव हमारे मन के विचारो पर पडता है। भारतीय संस्कृति की दिनचर्या नियमित, संयमित, आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाना ही होगा, लेकिन आज के इंसान की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि वह स्वंय को छोड़ सारे संसार को सुधारने की इच्छा रखता है। जो व्यक्ति सारे दिन धन, सम्पत्ति व भौतिक सुख साधनों को कमाने और भोगने में लगा रहता है, उसके साथ अंत में सिवाय पश्चाताप् के कुछ भी नही जाता। सच्चा ब्राह्मण वह जिसके माथे पर ब्रह्मज्ञान का तिलक हो, जो ब्रह्ममुहुर्त में उठता हो, सदा ब्रह्माभोजन सात्विक अन्न ग्रहण करने वाला हो और सबसे बडा ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाला हो। गीता ज्ञान के अंतिम दिन जिला पंचायत सदस्य , सरपंच, पंचायत प्रतिनिधि ग्राम के वरिष्ठ जन बच्चे ,माताएं,बहने बड़ी संख्या में उपस्थित रहे ।श्रीमतभगवत भगवान की बरात में ग्रामवासियों का भीड़ देखते ही बनी।

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